मुंबई के पूर्वी उपनगरों में मानसून के दौरान और उसके बाद सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक महत्वपूर्ण योजना को आगे बढ़ाया है। इसके तहत एल, एम-पूर्व और एम-पश्चिम वार्डों में आने वाले 9 मीटर से कम चौड़ाई वाले छोटे रास्तों पर बने गड्ढों और क्षतिग्रस्त पैच की मरम्मत की जाएगी। इस कार्य में 'मास्टिक डामर' तकनीक का उपयोग किया जाएगा, ताकि सड़कें लंबे समय तक मजबूत बनी रहें और बारिश के मौसम में भी उनकी गुणवत्ता कायम रहे।

इस परियोजना के लिए कुल 3.35 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था, जिसे प्रशासनिक प्रक्रिया और मोलभाव के बाद अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस कार्य की जिम्मेदारी मेसर्स सी.आर. शाह नामक कांट्रैक्टर को सौंपी गई है।

शुरुआत में इस काम के लिए ठेकेदारों की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण बीएमसी को निविदा की समय-सीमा बढ़ानी पड़ी थी। समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद भी केवल दो कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई। चूंकि मानसून बिल्कुल करीब आ चुका था, इसलिए निविदा प्रक्रिया को रद्द कर दोबारा नई प्रक्रिया शुरू करने में काफी समय लग सकता था, जिससे आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता। इसी आपातकालीन स्थिति और जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रस्ताव को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

इस बीच बीएमसी की स्थायी समिति ने प्रस्ताव पर पारदर्शिता और लागत को लेकर कई कड़े सवाल उठाए थे। समिति के सुझावों पर गंभीरता से अमल करते हुए प्रशासन ने ठेकेदार के साथ दोबारा मोलभाव किया। इसके बाद ठेकेदार अपनी दरों को कार्यालयीन अनुमान से पहले के 12 प्रतिशत की तुलना में 20 प्रतिशत तक कम करने पर सहमत हो गया। इस मोलभाव से मनपा को आर्थिक बचत होगी और सार्वजनिक धन का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सड़कों के काम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की है। कार्य की कड़ी निगरानी के लिए बीट ऑफिसर तैनात रहेंगे और परियोजना के तहत दो वर्ष का डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड निर्धारित किया गया है। भुगतान व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। इसके अनुसार, कार्य पूरा होने के बाद कांट्रैक्टर को केवल 80 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाएगा, जबकि शेष 20 प्रतिशत राशि डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के दौरान कार्य की स्थिति की समीक्षा के बाद सालाना आधार पर चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी।

यह पूरी परियोजना 31 मार्च 2027 तक चलेगी। इसके पूरा होने पर पूर्वी उपनगरों के स्थानीय निवासियों को गड्ढों से राहत मिलने के साथ उनका सफर अधिक सुरक्षित और सुगम होने की उम्मीद है।

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