मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में आगामी महानगरपालिका चुनावों को लेकर गर्माहट अपने चरम पर पहुंच गई है, जहाँ बयानबाजी के तीखे तीरों ने चुनावी बिसात बिछा दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता देवेंद्र फडणवीस ने एक निजी समाचार चैनल के साथ विशेष बातचीत में विपक्षी खेमे, विशेषकर उद्धव ठाकरे पर करारा हमला बोला है। फडणवीस ने आत्मविश्वास के साथ यह उद्घोषणा की है कि राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं में 'महायुति' का परचम लहराएगा और मेयर की कुर्सी पर हिंदू और मराठी चेहरा ही आसीन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन चुनावों में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आएगी, जो विरोधियों के समीकरणों को ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त है।

इस राजनीतिक संवाद के दौरान फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व और मराठी कार्ड पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने ठाकरे को सीधे तौर पर ललकारते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है, तो वे सार्वजनिक मंच से 'वंदे मातरम' और 'जय श्री राम' का नारा लगाकर दिखाएं। फडणवीस ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे अपनी राजनीति चमकाने के लिए हिंदू और मराठी समुदायों के बीच दरार पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। उत्तर भारतीयों के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने दृढ़ता से कहा कि उत्तर भारतीय इस देश का अभिन्न अंग हैं, वे पाकिस्तानी नहीं हैं। यह बयान क्षेत्रवाद की राजनीति करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

गठबंधन की राजनीति और विपक्ष के आरोपों पर भी फडणवीस ने बेबाकी से अपनी बात रखी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता शरद पवार के संदर्भ में उन्होंने साफ किया कि फिलहाल एनडीए के कुनबे में शरद पवार की एनसीपी के लिए कोई स्थान नहीं है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने नसीहत दी कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव और डर का अनुभव करना है, तो वे पाकिस्तान जाकर देखें। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने बांग्लादेशी रोहिंग्या घुसपैठ के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा इस चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा और तुष्टीकरण के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

भ्रष्टाचार के आरोपों और बीएमसी के कामकाज को लेकर फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को आईना दिखाया। अजित पवार द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर फडणवीस ने संक्षिप्त रूप से कहा कि अजित पवार स्वयं इन बातों का जवाब देने में सक्षम हैं, लेकिन उन्होंने ठाकरे से उनके 25 वर्षों के बीएमसी शासन का हिसाब मांग लिया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं अपने कार्यों का हिसाब देने की हिम्मत रखते हैं, लेकिन जिन्होंने दशकों तक सत्ता का सुख भोगा, वे जवाबदेही से भाग रहे हैं। फडणवीस का यह आक्रामक रुख न केवल आगामी निकाय चुनावों की दिशा तय कर रहा है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण को भी नई धार दे रहा है।

Pratahkal Bureau

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