मुंबई और दिल्ली में स्लम पुनर्विकास की बड़ी योजनाएं शुरू
मुंबई में एसआरए और दिल्ली में नई रिहैबिलिटेशन पॉलिसी के जरिए लाखों परिवारों को पक्के घर देने का लक्ष्य, सरकार ने पुनर्विकास परियोजनाओं को दी मंजूरी।

मुंबई के तटीय क्षेत्र के पास स्थित घनी आबादी वाली झुग्गी-झोपड़ी का हवाई दृश्य।
मुंबई। मायानगरी मुंबई को पूरी तरह से झुग्गी-मुक्त बनाने और हर नागरिक को सुरक्षित व सम्मानजनक पक्का घर देने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। मुंबई के सबसे बड़े झुग्गी-झोपड़ी इलाकों के कायाकल्प के लिए स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) ने कमर कस ली है। अंधेरी वेस्ट में 'जुहू गली' पायलट प्रोजेक्ट की अभूतपूर्व सफलता के बाद, अब बीएमसी और एसआरए प्रशासन मिलकर तीन और विशाल स्लम पॉकेट्स के पुनर्विकास को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। इसके तहत वडाला के अंटॉप हिल (450 एकड़), जोगेश्वरी ईस्ट के मसवाड़ी (260 एकड़) और बांद्रा ईस्ट के बेहरामपाड़ा (140 एकड़) के पुनर्विकास का प्रस्ताव राज्य सरकार की उच्चाधिकार प्राप्त समिति के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है।
इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चुनी गई विकासकर्ता कंपनी ने एसआरए को 35.1% का प्रीमियम देने की पेशकश की है, जो सामान्य 25% के बेंचमार्क से कहीं अधिक है। एसआरए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र कल्याणकर ने बताया कि हाउसिंग पॉलिसी 2025 के तहत मुंबई को स्लम-मुक्त बनाने के लिए ऐसे 18 और बड़े स्लम क्लस्टर्स की पहचान की गई है, जिनमें से प्रत्येक भूखंड 50 एकड़ से अधिक बड़ा है। इस कड़ी में मील का पत्थर साबित हुआ 101.4 एकड़ का जुहू गली प्रोजेक्ट मुंबई का पहला ऐसा क्लस्टर मॉडल है, जहां पात्र झुग्गीवासियों के लिए 28,000 से अधिक आधुनिक पुनर्वास घर बनाए जा रहे हैं। निवासियों के हितों की रक्षा के लिए डेवलपर्स पर कड़ी वित्तीय शर्तें लगाई गई हैं, जिसमें झुग्गीवासियों के लिए दो साल के ट्रांजिट रेंट के रूप में लगभग 750 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता और पोस्ट-डेटेड चेक शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मुंबई की तर्ज पर अब देश की राजधानी दिल्ली में भी झुग्गी पुनर्वास को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 16 जून 2026 को हुई बैठक में 'दिल्ली स्लम एंड जेजे क्लस्टर रिहैबिलिटेशन पॉलिसी 2026' को मंजूरी दी गई है, जिसका लक्ष्य करीब चार लाख परिवारों को स्थायी आवास देना है। दिल्ली सरकार ने भी अब पीपीपी मॉडल को अपनाते हुए पात्रता की कट-ऑफ तारीख को 1 जनवरी 2015 से बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर दिया है, जिससे बड़ी संख्या में नागरिक इस योजना के दायरे में आ सकेंगे। दिल्ली सरकार हर महीने मयूर विहार, सीलमपुर और लाजपत नगर जैसे इलाकों के लिए पांच नए टेंडर जारी करने की योजना पर काम कर रही है। दोनों महानगरों में चल रही यह मुहिम शहरी विकास के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगी।

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