कोस्टल रोड परियोजना से प्रभावित होने वाले पेड़ों की भरपाई पवई और पनवेल में वृक्षारोपण से होगी, वहीं बीएमसी मानसून में 50 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखेगी।

मुंबई के बुनियादी ढांचे का विकास अब पर्यावरण की कीमत पर होने जा रहा है, जिसने महानगरपालिका प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। मुंबई महानगरपालिका की ट्री समिति की हालिया बैठक में कोस्टल रोड परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसके अनुसार आगामी मानसून के दौरान परियोजना के मार्ग में आने वाले लगभग 1200 पेड़ों के प्रभावित होने की प्रबल आशंका है। विकास की इस बलि को संतुलित करने हेतु बीएमसी ने पवई और पनवेल में खाली जमीनों को चिन्हित किया है, जहाँ बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर इन पेड़ों की भरपाई करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यावरण संरक्षण की इसी कड़ी में बीएमसी इस मानसून 'एक घर, एक पेड़' की विशेष मुहिम का आह्वान करने जा रही है। शहर की लगभग 45 हजार हाउसिंग सोसायटियों और 10 हजार बंगलों को इस अभियान से जोड़कर 50 हजार से अधिक नए पौधे लगाने की योजना है, जिसकी देखरेख और वार्षिक ऑडिट की जिम्मेदारी स्वयं बीएमसी उठाएगी।

प्रशासनिक स्तर पर जहाँ जून के प्रथम सप्ताह में पालिका स्कूलों के बच्चों को स्कूली सामग्री और यूनिफॉर्म वितरण का प्रस्ताव लाया जा रहा है, वहीं नगर निगम के गलियारों में राजनीतिक पारा भी चढ़ा हुआ है। भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने शिवसेना (UBT) पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें उनके 25 साल के शासन और चार महापौरों के रसूख की याद दिलाई है। विपक्ष का आरोप है कि जो दल कभी सत्ता के अहंकार में रहता था, आज वह सदन की कार्यवाही में राजनीति न लाने की मिन्नतें करने पर विवश हो गया है।

राजनीतिक खींचतान के बीच मुंबई की सड़कों पर 'फेरीवाला माफिया' का बढ़ता आतंक जनजीवन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बोरीवली पश्चिम, मलाड और अंधेरी पश्चिम जैसे व्यस्त उपनगरों में स्थिति भयावह हो चुकी है, जहाँ एक अधिकृत फेरीवाले की आड़ में तीन-तीन अवैध फेरीवाले कब्जा जमाए बैठे हैं। मलाड के नटराज थिएटर क्षेत्र में तो 4 फुट के स्टॉल धारकों ने सामने की 40 फीट सड़क को अवैध रूप से निगल लिया है। रेलवे स्टेशनों के बाहर पैदल चलने वाले नागरिकों का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध होने से सड़के सिकुड़ती जा रही हैं। नागरिकों के बढ़ते आक्रोश के बीच इस संगठित माफिया पर तत्काल और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है, जो मुंबई के शहरी नियोजन और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

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