मुंबई के चेम्बूर में नवग्रह शांति अनुष्ठान, साध्वी निर्वाणश्री ने बताए बीज मंत्रों के गहन रहस्य
मुंबई के चेम्बूर में नवरात्रि के चतुर्थ दिन नवग्रह शांति अनुष्ठान आयोजित किया गया। साध्वी निर्वाणश्री ने ॐ, ह्रीं, क्लीं और ह्रौं बीज मंत्रों के रहस्य बताए, जबकि साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने ग्रहों के जप, ध्यान और तपस्या का महत्व समझाया।

चेम्बूर में नवरात्रि के चतुर्थ दिन आयोजित नवग्रह शांति अनुष्ठान में उपस्थित साधकगण।
चेम्बूर में नवरात्रि के चतुर्थ दिन आयोजित नवग्रह शांति अनुष्ठान के दौरान मंत्र जप, ध्यान और आध्यात्मिक साधना से सभागार का वातावरण भक्तिमय हो गया। आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य में नवग्रह शांति के विविध प्रयोगों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर बीज मंत्रों के महत्व और उनके प्रभावों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
मूल अनुष्ठान के बाद साध्वी निर्वाणश्री ने बीज मंत्रों से जुड़े गहन रहस्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने ॐ, ह्रीं, क्लीं और ह्रौं को अत्यंत प्रभावशाली बीज मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि जब किसी मंत्र के साथ बीज मंत्र जुड़ जाते हैं, तो उसका प्रभाव विशेष हो जाता है।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने नवग्रह शांति के विषय पर सरस एवं सारगर्भित प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों का हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है। जन्म कुंडली में शुभ और अशुभ ग्रहों की स्थितियों के कारण जीवन में सुख-दुःख तथा विभिन्न प्रकार के कष्ट आते हैं।
साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने जीवन में शांति, समाधि और समृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक ग्रह के जप तथा संबंधित स्थानों पर ध्यान को उपयोगी बताया। उनके मार्गदर्शन में भाई-बहनों ने नौ ग्रहों से संबंधित जप का प्रयोग पूरी तन्मयता के साथ किया।
अनुष्ठान के साथ-साथ साधकों की तपस्या का क्रम भी सुचारु रूप से जारी है। अनेक भाई-बहन विभिन्न प्रकार के तप कर रहे हैं। एकासन, दस प्रत्याख्यान और आयंबिल सहित तपस्या के अन्य निर्धारित क्रम भी नियमित रूप से चल रहे हैं। इसके अलावा, रात्रिकालीन जप और ध्यान के प्रयोग भी जारी हैं।
चेम्बूर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में नवग्रह शांति के प्रयोगों के साथ बीज मंत्रों, ग्रहों से संबंधित जप, ध्यान और तपस्या पर विशेष जोर दिया गया। साध्वी निर्वाणश्री और साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा के मार्गदर्शन में चल रहे इन आध्यात्मिक प्रयोगों के माध्यम से साधक धार्मिक अनुष्ठान और साधना के विभिन्न क्रमों में सहभागी बन रहे हैं।

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