मुंबई में तकनीक के दुरुपयोग से जुड़े एक गंभीर मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी से संबंधित एआई-जनरेटेड और मॉर्फ की गई तस्वीरों व वीडियो पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “बेहद परेशान करने वाला और चौंकाने वाला” करार दिया है। अदालत ने इस तरह की सभी आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री को तुरंत हटाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि में शिल्पा शेट्टी द्वारा दायर याचिका में बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का दुरुपयोग कर उनकी बिना अनुमति तस्वीरें, वीडियो, आवाज और हावभाव की नकल की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि इस सामग्री के कारण उनकी प्रतिष्ठा, गरिमा और निजी जीवन को गंभीर क्षति पहुंची है। यह आपत्तिजनक कंटेंट सोशल मीडिया, विभिन्न वेबसाइटों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहा था।

सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति, विशेष रूप से महिलाओं, को बिना सहमति इस तरह प्रस्तुत करना न केवल अनैतिक है बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी है। अदालत ने सोशल मीडिया कंपनियों, इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स और दूरसंचार विभाग को निर्देश दिया कि शिल्पा शेट्टी से जुड़ी सभी मॉर्फ्ड और एआई-जनरेटेड सामग्री से संबंधित लिंक, यूआरएल और पोस्ट तत्काल प्रभाव से हटाए जाएं।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि निजता और गरिमा का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है और तकनीक या नवाचार के नाम पर इसका उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। न्यायालय की इस टिप्पणी को डिजिटल युग में व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

यह मामला एआई के बढ़ते दुरुपयोग और उससे उत्पन्न कानूनी चुनौतियों का एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है, जिस पर आने वाले समय में विस्तृत कानूनी बहस और नीतिगत चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

Pratahkal Bureau

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