राष्ट्रगान के बाद सदन में विपक्ष का हंगामा, भारत माता व पीएम पर नारेबाजी; सभापति ने जांच के दिए आदेश
मुंबई में बीएमसी की कार्रवाई के बाद राष्ट्रगान समाप्त होते ही सभागृह में हुए हंगामे और भारत माता, भगवान राम व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी पर सभापति ने कड़ा रुख अपनाया है। पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि नियम उल्लंघन के आरोप भी सामने आए हैं।

मुंबई में बीएमसी की कार्रवाई समाप्त होने के बाद सभागृह में हुई नारेबाजी और अव्यवस्था को लेकर महापौर/सभापति ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही पूरी होने और राष्ट्रगान समाप्त होने के बाद विपक्ष के सदस्यों ने पूर्वनियोजित तरीके से भारत माता, भगवान राम और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अमर्यादित नारेबाजी की, जिससे सदन की गरिमा और अनुशासन को ठेस पहुंची। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
सभापति ने बताया कि राष्ट्रगान समाप्त होने के बाद जब वे स्वयं सदन से बाहर निकल रही थीं, तब भी कुछ नगरसेवक हाथों में फ्लेक्स लेकर लगातार विवादित नारे लगा रहे थे। उनके अनुसार विपक्ष के सदस्य पूरी तैयारी के साथ सदन में आए थे। उन्होंने कहा कि जब कैमरे चालू थे और सदन की कार्यवाही जारी थी, तब किसी ने इस प्रकार का विरोध नहीं किया, लेकिन जैसे ही औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई और सीसीटीवी कैमरे बंद हुए, उसके बाद जानबूझकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।
विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सभापति ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार असत्य फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान अनुशासन बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि किसी सदस्य को विरोध दर्ज कराना था, तो वह सभागृह के बाहर गलियारे में जाकर अपनी बात रख सकता था, लेकिन सदन के नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
नियमों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए सभापति ने बताया कि कांग्रेस के गट नेता अशरफ आजमी सदन के भीतर मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे, जबकि ऐसा करना प्रतिबंधित है। नियमों के उल्लंघन को देखते हुए उनका मोबाइल जब्त कर डेस्क पर रखवा दिया गया और उन्हें स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई कि कार्रवाई पूरी होने के बाद ही उनका उपकरण वापस किया जाएगा।
सभापति ने दोहराया कि सदन की मर्यादा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि छिपकर या चेहरे ढककर आपत्तिजनक टिप्पणी करना जनप्रतिनिधियों के आचरण के अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंद कैमरों के दौरान हुई नारेबाजी और इस पूरे घटनाक्रम में शामिल सदस्यों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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