मुंबई में मानसून की दस्तक से ठीक पहले महानगरपालिका प्रशासन द्वारा किए जा रहे नालेसफाई के बड़े-बड़े दावों पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। बीएमसी की स्थायी समिति की अहम बैठक में आज भारी हंगामा देखने को मिला, जहां मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर सभी दलों के सदस्यों ने एकजुट होकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।

प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि मुंबई के विभिन्न इलाकों में अब तक निर्धारित लक्ष्य से अधिक यानी 106 प्रतिशत नालेसफाई का काम पूरा कर लिया गया है। हालांकि, जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए लोकप्रतिनिधियों ने इस आंकड़े को पूरी तरह भ्रामक और कागजी करार दिया। सदस्यों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि प्रत्यक्ष रूप से जमीन पर नालों की सफाई बिल्कुल नहीं की गई है और मुंबई पर इस बार भी भारी जलजमाव का खतरा मंडरा रहा है।

बैठक के दौरान विशेष रूप से जोन 5 के अंतर्गत आने वाले नालों की दुर्दशा का मुद्दा गरमाया रहा। सदस्यों ने आरोप लगाया कि जोन 5 में नालेसफाई का जिम्मा संभालने वाले कंत्राटदार बीएमसी के संबंधित वॉर्ड अधिकारियों की ढुलमुल कार्यशैली और कथित मिलीभगत के कारण काम ही नहीं कर रहे हैं, जिससे नालों में कचरे और कीचड़ का अंबार लगा हुआ है। इसके साथ ही, मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली मीठी नदी और समुद्र में पानी छोड़ने वाले प्रमुख आउटफॉल की सफाई भी अत्यंत घटिया और आधी-अधूरी होने की बात सामने आई है।

इस प्रशासनिक लापरवाही पर तीखा प्रहार करते हुए बीएमसी के सभागृह नेता गणेश खणकर ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि प्रशासन इन भ्रामक आंकड़ों के जरिए जनता और जनप्रतिनिधियों को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सदन में मौजूद विभिन्न वार्डों के नगरसेवकों ने इस अव्यवस्था पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। नगरसेवकों का कहना है कि यदि 106 प्रतिशत सफाई का दावा सच है, तो पहली ही मूसलाधार बारिश में निचले इलाकों और झुग्गी-बस्तियों में कीचड़ पानी घुसना तय है। नगरसेवकों ने मांग की है कि कागजी रिपोर्ट पेश करने के बजाय वरिष्ठ अधिकारी स्वयं वॉर्ड स्तर पर जाकर नालों की गहराई की जांच करें।

बैठक के अंत में स्थायी समिति अध्यक्ष ने प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए निर्देश दिए कि 3 जून की समय सीमा से पहले मीठी नदी और सभी छोटे-बड़े नालों से शत-प्रतिशत गाद निकाली जाए, अन्यथा लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों पर सीधी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। महानगर में जलभराव के इस पुराने संकट पर यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में मुंबईकरों की मुश्किलें अत्यधिक बढ़ सकती हैं।

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