मुंबई बीएमसी स्थायी समिति बैठक: नालेसफाई दावों पर सत्तापक्ष और विपक्ष में हंगामा
बीएमसी बैठक में यशवंत किल्लेदार और विपक्षी पार्षदों ने नालेसफाई में देरी व भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, वहीं प्रशासन ने 85 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा किया।

मुंबई में मानसून की दस्तक से ठीक पहले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक में नालेसफाई के दावों को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। बैठक के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए गए और नालेसफाई कार्य की प्रगति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
बैठक में स्थायी समिति के सदस्य यशवंत किल्लेदार ने बीएमसी प्रशासन के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोप लगाया कि 31 मई तक 80 प्रतिशत कीचड़ निकालने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन वास्तविक स्थिति में अब तक केवल 20 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे टेंडर प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और नालेसफाई का प्रस्ताव जनवरी-फरवरी में लाया जाना चाहिए था, लेकिन इसे जानबूझकर विलंबित किया गया।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस के गटनेता और वरिष्ठ नगरसेवक अशरफ आजमी ने प्रशासन को घेरते हुए कहा कि एल वॉर्ड सहित कई क्षेत्रों में ठेकेदारों के पास न तो पर्याप्त मशीनें हैं और न ही कार्य का अनुभव। उन्होंने कहा कि इस सुस्ती के कारण 31 मई तक मुश्किल से 50 प्रतिशत ही कचरा निकाला जा सकेगा, जिससे इस वर्ष मानसून में मुंबई के डूबने का खतरा बना हुआ है।
वहीं भाजपा की नगरसेविका अंजली नाईक और प्रकाश दरेकर ने भी स्थिति को गंभीर बताते हुए चेतावनी दी कि घाटकोपर और दहिसर जैसे झोपड़पट्टी क्षेत्रों में ठेकेदार केवल कागजों पर 'हाथ की सफाई' दिखा रहे हैं, जिससे जनता में आक्रोश है। आरोप लगाया गया कि एक नाले का कचरा दूसरे नाले में डाला जा रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा और अधिक बढ़ रहा है।
इन तीखे आरोपों के बीच बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त विपीन शर्मा ने प्रशासन की ओर से सफाई देते हुए कहा कि सहायक आयुक्त और नगरसेवक स्वयं ग्राउंड पर जाकर काम की निगरानी कर रहे हैं और इस वर्ष कार्य पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार मीठी नदी में 56.15 प्रतिशत, छोटे नालों में 88.85 प्रतिशत और बड़े नालों में 85.15 प्रतिशत सहित कुल 85.16 प्रतिशत नालेसफाई का कार्य पूरा हो चुका है।
विवाद और विरोध के बीच स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने बड़ा निर्णय लेते हुए घोषणा की कि 25 और 26 मई 2026 को सभी नगरसेवकों और अधिकारियों के साथ पूरे मुंबई में नालेसफाई कार्य का संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि यदि ठेकेदार समय पर कार्य पूरा नहीं करते हैं, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट करने जैसी कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नालेसफाई को लेकर उठे इस राजनीतिक टकराव और प्रशासनिक दावों के बीच यह मुद्दा अब और अधिक गंभीर हो गया है, जिससे आगामी मानसून में मुंबई की तैयारियों और बाढ़ प्रबंधन पर पूरे शहर की निगाहें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau
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