मुंबई: अधिकृत फेरीवालों को मिलेंगे क्यूआर कोड वाले डिजिटल पहचान पत्र
बीएमसी ने अवैध वेंडर्स पर नकेल कसने के लिए 99,435 पंजीकृत फेरीवालों को क्यूआर कोड आईडी कार्ड देने की योजना शुरू की। महापौर रितू तावडे ने इसका उद्घाटन किया।

तस्वीर में मुंबई की महापौर रितू तावडे (हरे परिधान में) बीएमसी मुख्यालय के सभागार में एक व्यक्ति को क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र प्रदान करती हुई दिख रही हैं। उनके पास दाईं ओर मैरून साड़ी में एक अन्य महिला और पृष्ठभूमि में कई लोग खड़े हैं।
मुंबई की मायानगरी में दशकों से चले आ रहे फेरीवालों के विवादित मुद्दे के समाधान की दिशा में बीएमसी ने एक ऐतिहासिक और आधुनिक कदम उठाया है। शहर की सड़कों को व्यवस्थित करने और वैध फेरीवालों को सम्मानजनक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से, बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने पंजीकृत वेंडर्स के लिए 'क्यूआर कोड' आधारित डिजिटल पहचान पत्र योजना का आगाज किया है। इस क्रांतिकारी पहल का उद्देश्य अनधिकृत वेंडर्स पर लगाम लगाना और पंजीकृत फेरीवालों के अधिकारों को डिजिटल सुरक्षा कवच प्रदान करना है।
इस महत्वाकांक्षी योजना का औपचारिक शुभारंभ गुरुवार, 25 जून 2026 को बीएमसी मुख्यालय के स्थायी समिति सभागार में आयोजित किया गया। मुंबई की महापौर रितू तावडे ने इस अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 100 प्रमाणित फेरीवालों को स्वयं अपने हाथों से यह हाई-टेक पहचान पत्र सौंपे। समारोह के दौरान बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी और शहर के प्रमुख जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस डिजिटल बदलाव का स्वागत किया।
योजना के प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए महापौर रितू तावडे ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया माननीय न्यायालय के दिशा-निर्देशों और टाउन वेंडिंग एक्ट के पूर्ण अनुपालन के तहत संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि मुंबई के कुल 99,435 पंजीकृत फेरीवालों को ये विशेष क्यूआर कोड युक्त आई-कार्ड चरणबद्ध तरीके से वितरित किए जाएंगे। महापौर ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि अगस्त 2024 में वेंडिंग कमेटी के चुनावों की रुकी हुई मतगणना को अदालती प्रक्रिया के बाद पूर्ण करना इस नीति को लागू करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
इस डिजिटल प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शिता है। अब कोई भी नागरिक या बीएमसी का अधिकृत अधिकारी मात्र एक क्यूआर कोड स्कैन करके वेंडर की प्रामाणिकता और उसकी पंजीकरण स्थिति की त्वरित जांच कर सकेगा। इस आयोजन में स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, सभागृह नेता गणेश खणकर समेत अमेय घोले, अशरफ आजमी, यशवंत किल्लेदार, संध्या दोशी, राजेश्री शिरवडकर, दीपमाला बढे, प्रीती सातम, शीतल गंभीर, डॉ. सईदा खान, रमाकांत रहाटे, तेजिंदर सिंह तिवाना, शिवकुमार झा और लाइसेंस अधीक्षक अनिल काटे जैसे कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बीएमसी की यह नई व्यवस्था न केवल फेरीवालों के व्यवसाय को वैधता प्रदान करेगी, बल्कि मुंबई की सड़कों पर अनधिकृत गतिविधियों को नियंत्रित करने में भी मील का पत्थर साबित होगी। यह डिजिटल पहचान पत्र न केवल फेरीवालों की पहचान का आधार बनेंगे, बल्कि शहर के प्रबंधन में तकनीक के समावेश का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, जिससे पात्र लोगों को उनके अधिकार मिलने के साथ-साथ आम जनता के लिए भी आवाजाही सुगम हो सकेगी।

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