मानसिक स्वास्थ्य और फिल्म 'रिस्टार्ट' पर बीएमसी का विशेष आयोजन
संस्कृति मंत्रालय और बीएमसी ने राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में फिल्म 'रिस्टार्ट' की स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया।

मुंबई। आधुनिक जीवन की अंधी दौड़, जानलेवा डिप्रेशन और मानसिक तनाव जैसी गंभीर विसंगतियों से जूझ रहे इंसानी जीवन को संबल देने तथा समाज में इस संवेदनशील विषय पर संवाद की नई शुरुआत करने के लिए एक बेहद अभूतपूर्व और सराहनीय कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के विशेष सहयोग से मुंबई स्थित राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) में ‘सेलिब्रेटिंग मुंबई - ए यूनेस्को क्रिएटिव सिटी ऑफ फिल्म’ अभियान के अंतर्गत फिल्म ‘रिस्टार्ट’ की एक विशेष स्क्रीनिंग का गरिमामयी आयोजन किया गया। जाने-माने फिल्म निर्देशक इकबाल रिजवी द्वारा निर्देशित यह फिल्म मुख्य रूप से आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जैसे बेहद संवेदनशील, अनछुए और गंभीर विषयों पर प्रहार करती है। फिल्म की पटकथा में दुख, अपराधबोध, बेबसी और घने अंधेरे के बीच जीवन में उम्मीद की किरण जैसे विभिन्न भावनात्मक पहलुओं को बेहद सजीवता के साथ बड़े पर्दे पर उतारा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक झिझक और रूढ़ियों को जड़ से समाप्त करना है।
इस बेहद संवेदनशील फिल्म के प्रदर्शन के तुरंत बाद कला संग्रहालय परिसर में “फ्रेमिंग कन्वर्सेशन्स अराउंड द अनस्पोकन” (अनकही बातों पर संवाद की रूपरेखा) विषय पर एक विशेष परिचर्चा और सघन प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया। इस अत्यंत ज्ञानवर्धक और वैचारिक चर्चा में फिल्म के निर्देशक व निर्माता इकबाल रिजवी, मुख्य कलाकार राहुल सिंह, आश्लेषा वशिष्ठ, अद्रिजा शर्मा, प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉ. सोनल दीक्षित और लेखक अंकुर मित्तल ने सक्रिय रूप से सहभागिता करते हुए अपने विचार साझा किए। मंच पर मौजूद सभी विशेषज्ञों ने फिल्म की मूल आत्मा और आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता की तात्कालिक आवश्यकता पर गंभीर मंथन किया। कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय नगरसेवकों ने भी इस मुहिम की मुक्तकंठ से सराहना की और पुरजोर तरीके से कहा कि कला और फिल्मों जैसे सशक्त माध्यमों के जरिए सामाजिक बदलाव की राह बेहद आसान हो जाती है। सामाजिक सरोकार से जुड़ते हुए नगरसेवकों ने बीएमसी के वॉर्ड स्तर पर भी ऐसे जागरूकता सत्र और स्क्रीनिंग आयोजित करने की पुरजोर मांग उठाई है।
इस पूरे आयोजन की सफलता ने आधिकारिक तौर पर यह अकाट्य साबित कर दिया है कि समाज में सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए कला और सिनेमा की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण और निर्णायक हो सकती है। कला, विमर्श और जीवंत संवाद के माध्यम से सामाजिक चेतना का स्तर बढ़ाने के प्रति राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय और बीएमसी की अटूट प्रतिबद्धता इस पूरे कार्यक्रम में साफ तौर पर परिलक्षित हुई। इस विशेष और ऐतिहासिक मौके पर बीएमसी के व्यवसाय विकास विभाग की प्रमुख डॉ. शशि बाला सहित महानगरपालिका के विभिन्न प्रशासनिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के कई नामचीन कलाकार और बहुत बड़ी संख्या में प्रबुद्ध दर्शक उपस्थित थे, जिन्होंने इस विचारोत्तेजक फिल्म और परिचर्चा की जमकर सराहना करते हुए इसे वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बताया।

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