मुंबई बीएमसी चुनाव: वर्षा गायकवाड़ का बीजेपी पर तीखा प्रहार, घोषणापत्र को बताया 'फेकूनामा'
मुंबई बीएमसी चुनाव से पहले कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने बीजेपी के घोषणापत्र को 'फेकूनामा' करार देते हुए महायुति सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 90 हजार करोड़ की बैंक राशि के दुरुपयोग और उद्योगपतियों को जमीन सौंपने का मुद्दा उठाते हुए जनता को गुमराह न होने की चेतावनी दी। मुंबई की राजनीति में आए इस भूचाल की पूरी विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

मुंबई। बीएमसी चुनाव की आहट के साथ ही देश की आर्थिक राजधानी में सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा बीएमसी चुनावों के लिए जारी किए गए घोषणापत्र ने शहर के राजनीतिक गलियारे में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इस घोषणापत्र को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'झूठे वादों का पुलिंदा' करार दिया है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने बीजेपी और महायुति गठबंधन पर हमलावर रुख अपनाते हुए इस घोषणापत्र को "फेकूनामा" की संज्ञा दी है। गायकवाड़ ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर महायुति सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में मुंबई महानगरपालिका की तिजोरी पर सरेआम डाका डाला है और अब हार के डर से जनता को गुमराह करने के लिए सुनहरे सपनों का जाल बुन रही है।
इस राजनीतिक घमासान के बीच वर्षा गायकवाड़ ने आंकड़ों और तथ्यों के साथ सत्तापक्ष को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों तक बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का बीएमसी पर कब्जा रहा और पिछले लगभग 4 वर्षों से प्रशासक के माध्यम से मंत्रालय से ही रिमोट कंट्रोल के जरिए मुंबई का प्रशासन चलाया जा रहा है। गायकवाड़ का दावा है कि नियमों और कायदों को ताक पर रखकर फाइलें मंजूर की जा रही हैं, जिसके कारण आज महापालिका के हर विभाग में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें जमा चुका है। कांग्रेस का आरोप है कि बीएमसी की 90 हजार करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट राशि का दुरुपयोग किया गया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों से आगे बढ़ते हुए गायकवाड़ ने जमीन आवंटन और निजीकरण के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेरा। उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि मुंबई की हजारों एकड़ कीमती जमीन चहेते उद्योगपतियों के हवाले कर दी गई है। इसके साथ ही, मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली बेस्ट बस सेवा के निजीकरण और 'सिटीफ्लो' जैसी निजी बसों को अवैध तरीके से संरक्षण देने पर भी सवाल उठाए गए। गायकवाड़ ने शिक्षा के निजीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महापालिका के स्कूलों को निजी संस्थाओं को सौंपना आम जनता के साथ विश्वासघात है। यह हमला केवल एक चुनावी विरोध नहीं, बल्कि मुंबई के भविष्य और इसकी स्वायत्तता को लेकर एक बड़ी वैचारिक जंग का संकेत दे रहा है, जिसका सीधा असर आगामी निकाय चुनावों के नतीजों पर पड़ना तय है।

Pratahkal Bureau
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