मुंबई में 14 फीट से ऊंची 39 हजार झोपड़ियों पर चलेगा बीएमसी का हथौड़ा, विरोध तेज
बीएमसी द्वारा 1 अक्टूबर से प्रस्तावित तोड़ाव कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने गरीब परिवारों के पुनर्वास की मांग उठाई है।

मुंबई। मुंबई की झुग्गी-बस्तियों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों के खिलाफ बीएमसी द्वारा बड़े पैमाने पर तोड़ाव कार्रवाई शुरू करने के फैसले से राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। बीएमसी प्रशासन ने करीब 39 हजार ऐसी झोपड़ियों की पहचान की है, जिनके खिलाफ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच कार्रवाई की जानी है। आदेश के बाद मुंबई की गरीब आबादी और झुग्गी-बस्ती क्षेत्रों में डर और असुरक्षा का माहौल है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने बीएमसी प्रशासन और सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के बीएमसी ग्रुप लीडर अशरफ आजमी ने महापौर रितू तावड़े और बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर तोड़ाव अभियान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
अशरफ आजमी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अवैध निर्माणों का समर्थन नहीं करती, लेकिन वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के बिना उनके घरों को तोड़ना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव के दौरान 40 लाख सस्ते मकान देने और मुंबई को स्लम-फ्री बनाने का वादा करने वाली सरकार अब गरीबों के सिर से छत क्यों छीनने पर आमादा है।
इस बीच बीएमसी के सदन नेता और बीजेपी नेता गणेश खणकर ने भी कार्रवाई को लेकर चिंता जताते हुए इसे स्थगित करने की मांग की है। इसके बाद कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल और बीएमसी प्रशासन के बीच तालमेल की कमी पर भी सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि बीएमसी अधिकारियों की दशकों पुरानी नाकामी का बोझ गरीब जनता पर नहीं डाला जाना चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि एसआरए और म्हाडा जैसी योजनाओं के माध्यम से पहले प्रभावित परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए जाएं और उसके बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाए। ऐसे में 1 अक्टूबर से प्रस्तावित कार्रवाई से पहले पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

Pratahkal Bureau
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