मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली 'बेस्ट' बस सेवा को लेकर एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। शहर की महापौर रितू तावडे ने स्पष्ट कर दिया है कि बीएमसी अब 'बेस्ट' को पूरी तरह आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कमर कस चुका है। शुक्रवार को बीएमसी मुख्यालय में हुई एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक में महापौर ने घोषणा की, कि प्रशासन अब किराए की बसों के बजाय 'बेस्ट' की अपनी खुद की बसों का काफिला बढ़ाने को प्राथमिकता देगा। यह कदम न केवल परिवहन सेवा को सुधारेगा, बल्कि मुंबईकरों के लिए सफर को और भी भरोसेमंद बनाएगा।

कर्मचारियों के हितों और बकाया भुगतान पर संवेदनशील निर्णय

इस बैठक का सबसे संवेदनशील पहलू कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कामगारों से जुड़ा रहा। महापौर ने भरोसा दिलाया कि वे उन कर्मचारियों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं जो सालों से अपनी ग्रेच्युटी और अन्य कानूनी देनदारियों के इंतजार में हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि "रिटायर हो चुके कर्मचारियों के बकाया पैसों का भुगतान जल्द से जल्द करने के लिए एक ठोस योजना बनाई जाए।" इसके अलावा, वेतन समझौते, पदोन्नति और अनुकंपा के आधार पर होने वाली भर्तियों जैसे लंबित मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। महापौर ने 'बेस्ट' यूनियन के पदाधिकारियों से सीधे संवाद कर उनकी मुश्किलें सुनीं और उनके जल्द निवारण का आश्वासन दिया।

आर्थिक स्वावलंबन और कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर

महापौर रितू तावडे ने जोर देते हुए कहा कि " 'बेस्ट' सिर्फ एक बस सेवा नहीं, बल्कि मुंबई की पहचान है।" इसे घाटे से उबारने के लिए अब केवल सरकारी मदद पर निर्भर रहने के बजाय आय बढ़ाने के नए रास्ते खोजने होंगे। उन्होंने बेस्ट प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि वे अपनी कार्यक्षमता बढ़ाएं और एक ऐसा मॉडल तैयार करें जिससे यह संस्था आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सके। आने वाले दिनों में इस प्रगति की समीक्षा के लिए नियमित बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।

Pratahkal Bureau

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