मुंबई की जीवनरेखा मानी जाने वाली बेस्ट बस सेवा पर कर्मचारियों की हड़ताल का गहरा असर देखने को मिल रहा है। बसों के पहिए थमने से महानगर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है और लाखों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, बेस्ट कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।

‘बेस्ट संयुक्त कामगार कृती समिती’ के आह्वान पर कर्मचारियों, श्रमिकों और अधिकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में व्यापक आंदोलन शुरू किया है। समिति के अनुसार, इस आंदोलन में सभी यूनियनों और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कर्मचारियों ने शत-प्रतिशत भागीदारी दर्ज कराई है। हालांकि, समिति ने हड़ताल के कारण आम नागरिकों को हो रही असुविधा पर खेद व्यक्त किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष बेस्ट उपक्रम के अस्तित्व और कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लड़ा जा रहा है।

गतिरोध को समाप्त करने के उद्देश्य से परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की पहल पर समिति के प्रतिनिधियों और संबंधित पक्षों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कृती समिती ने मांग रखी कि कर्मचारियों के मासिक वेतन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण जैसी अंतिम देनदारियों की जिम्मेदारी सीधे बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा ली जाए तथा बेस्ट के बजट का बीएमसी में विलय किया जाए।

इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान, वर्ष 2016 से 2026 तक के अंतिम वेतन समझौते के मुद्दे, वेट-लीज पर कार्यरत कर्मचारियों को बेस्ट सेवा में समाहित करने, ‘समान काम-समान वेतन’ लागू करने तथा रिक्त पदों पर भर्ती जैसे विषय भी बैठक में प्रमुखता से उठाए गए। समिति का दावा है कि परिवहन मंत्री ने इन मांगों को उचित ठहराते हुए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ चर्चा कर अंतिम निर्णय लेने का आश्वासन दिया था।

हालांकि, स्थिति तब विवादित हो गई जब बेस्ट प्रशासन की ओर से जारी बैठक की आधिकारिक रिपोर्ट में इन सकारात्मक आश्वासनों और चर्चाओं का उल्लेख नहीं किया गया। कृती समिती का आरोप है कि कुछ राजनीतिक शक्तियों और तथाकथित मजदूर नेताओं के दबाव में प्रशासन ने मंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक संकेतों को सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनने से रोकने का प्रयास किया है।

समिति का कहना है कि प्रशासन के इस रवैये से कर्मचारियों के बीच असंतोष और अधिक बढ़ गया है, जिसके कारण आंदोलन को वापस लेना या शांत करना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है। इसी क्रम में ‘बेस्ट संयुक्त कामगार कृती समिती’ के निमंत्रक एडवोकेट उदयकुमार आंबोणकर ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया है कि बेस्ट के समक्ष खड़े वित्तीय संकट और उसके अस्तित्व से जुड़े गंभीर प्रश्नों पर किसी भी समय आपातकालीन बैठक बुलाकर ठोस और अंतिम निर्णय लिया जाए।

मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़े इस व्यापक प्रभाव के बीच अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। कर्मचारियों की मांगों और प्रशासनिक रुख के बीच जारी यह टकराव न केवल बेस्ट उपक्रम के भविष्य बल्कि महानगर की दैनिक जीवनशैली और परिवहन व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

Pratahkal Bureau

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