स्थानीय नागरिकों और हिंदू संगठनों ने रिहायशी इलाकों में बकरे काटने का विरोध किया, नगरसेवकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।

आगामी बकरीद त्योहार के मद्देनजर मुंबई के आवासीय परिसरों, सोसायटियों और चालों में खुले तौर पर बकरों की कुर्बानी देने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और हिंदू संगठनों ने इस प्रथा पर कड़ा ऐतराज जताते हुए स्पष्ट किया है कि रिहायशी इलाकों में सरेआम बकरे काटना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

संगठनों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर नियमों का उल्लंघन कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। उन्होंने मांग की है कि बकरों की कुर्बानी केवल सरकार द्वारा अधिकृत कत्तलखानों या लाइसेंस प्राप्त दुकानों में ही दी जाए, ताकि सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी और तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।

इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर स्थानीय नगरसेवकों और नागरिक प्रतिनिधियों ने मुंबई पुलिस कमिश्नर तथा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) प्रशासन को पत्र सौंपकर सख्त रुख अपनाने की विनती की है। पत्र में नगरसेवकों ने पुलिस से मांग की है कि त्योहार के दौरान सभी सोसायटियों में कड़ी निगरानी रखी जाए।

साथ ही चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा गया है कि यदि किसी भी इलाके में हिंदुओं या स्थानीय निवासियों को डरा-धमकाकर जबरन खुले में कुर्बानी देने की कोशिश की गई, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उसका उसी भाषा में मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

प्रशासन से अपील की गई है कि कानून-व्यवस्था और शहर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए। यह पूरा मामला त्योहार के दौरान शहर की शांति, व्यवस्था और सामाजिक समरसता बनाए रखने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।

Pratahkal Bureau

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