मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण और गिरते हवा के स्तर को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की शुक्रवार को आयोजित आम सभा की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। शहर में प्रदूषण के कारणों और उसे नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा के दौरान जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। महापौर रितु तावड़े ने अधिकारियों को सभी सुझावों पर ध्यान देने और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।

बैठक में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त अविनाश ढाकने ने मुंबई को दुनिया के चौथे सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल करने वाली रिपोर्टों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि समुद्र से आने वाली नमकीन धुंध भी वायु प्रदूषण के कारणों में शामिल है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि वाहनों से निकलने वाला धुआं और निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। उनके इस बयान से असंतुष्ट जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जवाब मांगा।

विपक्ष की नेता किशोरी पेडनेकर ने बीएमसी के 28-सूत्रीय नियमों के पालन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इन नियमों को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है या वे केवल कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम इलाकों में धूल नियंत्रण के उपायों की तुलना में वीआईपी दौरों के दौरान ऐसी व्यवस्थाएं अधिक दिखाई देती हैं।

मनसे के नगरसेवक यशवंत किल्लेदार ने शिवाजी पार्क के आसपास धूल के कारण बच्चों में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ने पर चिंता जताई। वहीं, शिवसेना (शिंदे) के नेता अमेय घोले ने वाहनों के लिए ऑड-ईवन योजना लागू करने का सुझाव दिया। कांग्रेस के अशरफ आजमी ने पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया, जबकि सदन के नेता गणेश खणकर ने प्रदूषण कम करने के लिए रिसाइकिल किए गए पानी से सड़कों की धुलाई करने का सुझाव दिया।

बैठक में महापौर रितु तावड़े ने बताया कि बीएमसी को प्रदूषण और अवैध निर्माण से संबंधित करीब 7,500 शिकायतें मिली हैं। उन्होंने निजी बिल्डरों के प्रदूषण मापने वाले बोर्डों पर गलत जानकारी प्रदर्शित किए जाने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने रेडी-मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांटों को मुंबई से बाहर ले जाने के निर्देश दिए, ताकि निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सके।

दूसरी ओर, अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त अविनाश ढाकने ने स्पष्ट किया कि हवा में समुद्री नमक का प्रभाव प्राकृतिक है और इसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रशासन वाहनों से निकलने वाले धुएं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है।

बैठक में उठाए गए सवालों, सुझाए गए उपायों और महापौर के निर्देशों के बाद अब प्रदूषण नियंत्रण के लिए बीएमसी की कार्रवाई पर ध्यान रहेगा। करीब 7,500 शिकायतों, निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल और वाहनों के धुएं से जुड़ी समस्याओं के बीच नियमों का जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती है।

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