मोनोरेल का सफर थमा; अनिश्चितकाल के लिए सेवाएं बंद
दस साल की सेवा के बाद मुंबई मोनोरेल को तकनीकी खामियों और लगातार बाधित हो रही सेवाओं के कारण अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया। एमएमआरडीए ने आधुनिकीकरण और पुनर्वास कार्य पूरे होने तक सेवाएं स्थगित रखने का फैसला किया है।

मुंबई। मुंबई की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक रही मोनोरेल शनिवार, 20 सितंबर से अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई। दस साल तक शहरवासियों की सेवा करने के बाद अब यह परियोजना तकनीकी दिक्कतों और घटती सवारी संख्या के कारण ठप हो गई है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने आधुनिकीकरण और पुनर्वास कार्य पूरे होने तक सेवाएं स्थगित रखने का निर्णय लिया है।
मुंबई की सड़कों को भीड़ और जाम से निजात दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने करीब 2,500 करोड़ रुपये की लागत से चेंबूर से लेकर संत गाडगे महाराज चौक, सात रस्ता तक 20 किलोमीटर लंबे मोनोरेल कॉरिडोर का निर्माण कराया था। वडाला, भक्ति पार्क, मैसूर कॉलोनी, आरसीएफ और भारत पेट्रोलियम जैसे इलाकों को जोड़ने वाली यह लाइन एक समय पर वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में उम्मीद की किरण बनी थी। हालांकि, बीते वर्षों में इसकी सवारी संख्या अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी और तकनीकी खराबियों के कारण सेवाएं बार-बार प्रभावित होती रहीं।
एमएमआरडीए अधिकारियों के अनुसार, मोनोरेल को फिलहाल पूरी तरह बंद रखने का निर्णय यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। नियोजन के तहत अब इस प्रणाली में आधुनिकीकरण के कार्य किए जाएंगे। नई ट्रेनों के हिसाब से सिग्नलिंग प्रणाली को अपडेट किया जाएगा और तकनीकी खामियों को दूर कर इसे अधिक सुरक्षित और सुचारु बनाया जाएगा।
मोनोरेल सेवाएं बंद होने से रोजाना इस मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। अब उन्हें टैक्सियों, निजी वाहनों और बेस्ट बसों पर निर्भर होना पड़ेगा। स्थानीय निवासी और दैनिक यात्री मानते हैं कि मोनोरेल ने उन्हें जाम से राहत तो दी थी, लेकिन बार-बार होने वाली तकनीकी दिक्कतों ने उनकी परेशानी भी बढ़ाई। उल्लेखनीय है कि शुरुआती दौर में मोनोरेल को लेकर काफी उत्साह देखा गया था, परंतु समय के साथ इसकी सवारी संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई। घटती लोकप्रियता के कारण इसे “सफेद हाथी” तक कहा जाने लगा। इसके बावजूद, यह परियोजना मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही, जिसने शहर के कई इलाकों को आपस में जोड़ा और एक नई यातायात संस्कृति को जन्म दिया।
अब जब यह सेवा अनिश्चितकाल के लिए बंद हो चुकी है, तो मुंबईकरों की निगाहें एमएमआरडीए पर टिकी हैं कि वह कब तक आधुनिकीकरण और तकनीकी सुधार का कार्य पूरा कर पाता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि मोनोरेल नई ऊर्जा और सुरक्षित तकनीक के साथ फिर से पटरियों पर लौट पाती है या नहीं। मोनोरेल का यह ठहराव केवल तकनीकी सुधार का इंतजार नहीं है, बल्कि यह मुंबई जैसे महानगर की परिवहन व्यवस्था को और अधिक सक्षम व सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया कदम भी है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
