मुंबई। चेंबूर के सेंट एंथनी गर्ल्स हाई स्कूल में मेहंदी लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शिक्षा विभाग तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रशासन ने कुछ छात्राओं को हाथों पर मेहंदी लगाने के कारण कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। नाराज अभिभावकों ने इस पूरे मामले की शिकायत शिक्षा विभाग में दर्ज कराई, जिसके बाद विभाग ने स्कूल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

घटना के अनुसार, बीते सप्ताह लगभग 10 से 15 छात्राओं को स्कूल की कक्षा में प्रवेश से रोका गया। अभिभावकों का आरोप है कि सिर्फ मेहंदी लगाने की वजह से उनकी बेटियों को क्लास में बैठने नहीं दिया गया, जो न केवल अनुचित है बल्कि छात्राओं के अधिकारों का उल्लंघन भी है। इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय समुदाय में भी इस फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

वहीं, स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों के आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सफाई पेश की है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि किसी भी छात्रा के साथ भेदभाव नहीं किया गया, बल्कि उन्हें केवल अनुशासन और स्कूल की ड्रेस कोड नीति का पालन करने के लिए कहा गया था। प्रशासन का तर्क है कि मेहंदी लगाने की मनाही लंबे समय से स्कूल के अनुशासन नियमों का हिस्सा रही है, जिसका सभी को पालन करना आवश्यक है।

शिक्षा विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में स्कूल प्रशासन की गलती पाई जाती है, तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल को अपनी नीतियों में लचीलापन दिखाना चाहिए ताकि बच्चों की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर रोक न लगे।

यह घटना न केवल एक स्कूल के अनुशासन और सांस्कृतिक स्वतंत्रता के बीच टकराव का उदाहरण बन गई है, बल्कि इसने शिक्षा संस्थानों में नियमों की सीमाओं पर भी बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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Pratahkal Bureau

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