‘नटरंग उभा’ में दिखा मराठी रंगमंच का सफर, परंपरा से आधुनिक मंच तक की झलक
सेंट झेवियर्स कॉलेज के मराठी वाङ्मय मंडल के ‘नटरंग उभा’ कार्यक्रम में मराठी रंगमंच की विभिन्न परंपराओं को प्रस्तुत किया गया। नाटक, संगीत, साहित्य, नृत्य और कलाकारों की परिचर्चा ने इसकी बदलती यात्रा को सामने रखा।

मुंबई: सेंट झेवियर्स कॉलेज के मराठी वाङ्मय मंडल ने ‘नटरंग उभा’ विषय पर उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें मराठी रंगमंच के विकास और उसकी बदलती अभिव्यक्तियों को मंच पर प्रस्तुत किया गया। नाटक, संगीत, नृत्य, साहित्य और ललित कलाओं को एक साथ जोड़ते हुए दादा और पोती के संवाद के माध्यम से पारंपरिक रंगमंचीय शैलियों को समकालीन अभिव्यक्ति से जोड़ा गया।
कार्यक्रम की प्रस्तुति पाँच हिस्सों में हुई। पहले हिस्से ‘समकालीन रंगमंच’ को नाट्य विभाग ने नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रस्तुति ‘दशावतार’ की ओर बढ़ी, जिसे नाट्य और ललित कला विभाग ने मंचित किया। इसमें वराह अवतार की कहानी से लेकर वेशभूषा और रंगमंचीय श्रृंगार तक, इस कला-रूप से जुड़ी नाटकीय दुनिया को प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद संगीत विभाग ने ‘संगीत नाटक’ प्रस्तुत किया और पद्म श्री से सम्मानित हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका एवं रंगमंच कलाकार जयमाला शिलेदार को आदरांजलि दी। पाँच दशकों के करियर में ४५०० से अधिक प्रस्तुतियाँ देने वाली शिलेदार के योगदान को ‘संगीत मानपमान’ और ‘संगीत सौभद्र’ के चुनिंदा गीतों और दृश्यों के साथ-साथ ‘देवमाणूस’ की झलक के जरिए मंच पर दिखाया गया।
साहित्य विभाग की प्रस्तुति ‘सामाजिक-राजनीतिक रंगमंच’ में कलात्मक अभिव्यक्ति और समाज के बीच के संबंध को सामने रखा गया। अपने विचारों के लिए विरोध का सामना कर रहे एक लेखक के सफर के माध्यम से यह दिखाया गया कि कलाकार सामाजिक अवलोकनों और विचारों को व्यक्त करने के लिए रूपक और प्रस्तुति का इस्तेमाल किस तरह करते हैं।
कार्यक्रम का समापन नृत्य विभाग की ‘तमाशा’ प्रस्तुति के साथ हुआ। इसमें “तमाशा की साम्राज्ञी” विठाबाई नारायणगांवकर की विरासत का जश्न मनाया गया। प्रस्तुति के जरिए महाराष्ट्र की लोक-रंगमंच परंपरा की ऊर्जा और सांस्कृतिक समृद्धि को मंच पर उतारा गया।
कार्यक्रम में मराठी सांस्कृतिक और प्रदर्शन कला से जुड़े कलाकारों देवेंद्र पेम, मेघा घाडगे और मयूर सुकाले के साथ परिचर्चा भी आयोजित की गई। इसमें मराठी रंगमंच के बदलते स्वरूप और इसकी निरंतर प्रासंगिकता पर चर्चा हुई।
विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए देवेंद्र पेम जी ने कहा, “कॉलेज में गलतियाँ करने का मौका मिलता है। उन गलतियों से ही हम बड़े होते हैं। रंगमंच से जुड़ाव होना बहुत ज़रूरी है।”
104वे वर्ष में कदम रख रहे मराठी वाङ्मय मंडल के ‘नटरंग उभा’ कार्यक्रम ने मराठी रंगमंच के अतीत को प्रस्तुत करने के साथ उसकी पीढ़ियों तक पहुंचने वाली स्मृतियों को भी सामने रखा। प्रस्तुति ने दिखाया कि तौर-तरीके और विचार बदलते रहने के बावजूद कलाकार और दर्शकों के बीच का रिश्ता बना रहता है और यही संबंध मराठी रंगमंच को मंच पर लगातार नई आवाज़ें देता रहता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
