मुंबई में 1 मई से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के बाद नियम का पालन नहीं कर पाने वाले चालकों पर आरटीओ की कार्रवाई का विरोध तेज हो गया है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात कर मराठी भाषा नहीं सीख पाने वाले चालकों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और जुर्माना लगाने पर रोक लगाने की मांग की।

संजय निरुपम ने कहा कि करीब 10 से 15 प्रतिशत चालक कुछ कारणों से अब तक मराठी नहीं सीख पाए हैं। ऐसे चालकों को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए और प्रशिक्षण वर्ग जारी रहने चाहिए।



इस मुद्दे पर मुंबई में ऑटो-रिक्शा यूनियन के नेता शशांक राव ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि संघ की ओर से ढाई महीने का पाठ्यक्रम चलाया गया था, जिसमें कई चालकों ने प्रमाण पत्र प्राप्त किए हैं। राव ने स्पष्ट किया कि ऑटो का बैच और परमिट लेते समय स्थानीय मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना एक पुरानी शर्त है और इसका पालन करना आवश्यक है।

हालांकि, कई चालक इस प्रक्रिया से छूट गए हैं। इसे देखते हुए शशांक राव ने भी 13 अगस्त को पत्र लिखकर समय सीमा तीन महीने बढ़ाने और तब तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया था।

संजय निरुपम और ऑटो-रिक्शा यूनियन की मांगों पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 12 अगस्त के सरकारी आदेश का उल्लंघन कर किसी भी चालक से आर्थिक जुर्माना वसूलने वाले आरटीओ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन मंत्री ने बताया कि प्रशासन ने चालकों को मराठी सीखने के लिए 105 दिनों का समय दिया था और इसके लिए 1,800 शिक्षक तैनात किए गए थे। उन्होंने घोषणा की कि फिलहाल नियम का पालन नहीं करने वाले चालकों को केवल एक महीने का कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।

मंत्री के अनुसार, इस नोटिस अवधि के दौरान यदि कोई आरटीओ अधिकारी चालक का लाइसेंस, परमिट या बैज जप्त करता है अथवा जुर्माना लगाता है, तो यह पूरी तरह गैर-कानूनी माना जाएगा। इस निर्णय से मराठी भाषा नियम के अनुपालन और आरटीओ कार्रवाई को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट हो गई है।

Pratahkal Newsroom

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