मनोरी डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद, एनओसी नहीं मिलने का हवाला देकर मछुआरों ने काम रोकने की मांग की
मुंबई के मनोरी डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट को लेकर मछुआरा समुदाय ने विरोध तेज कर दिया है। 200 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाली परियोजना पर एनओसी नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए निर्माण रोकने की मांग की गई है, जबकि बीएमसी ने अपना पक्ष रखा है।

मुंबई में मनोरी डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट के विरोध में प्रदर्शन करते मछुआरा समुदाय के लोग और संबोधित करते प्रतिनिधि।
मुंबई। मुंबई के तटीय इलाकों में पानी की किल्लत दूर करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा प्रस्तावित 200 मिलियन लीटर प्रति दिन क्षमता वाले मनोरी डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोमवार को मछुआरा समुदाय के प्रतिनिधियों ने परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोकने की मांग की। मछुआरों का कहना है कि मत्स्य विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी नहीं होने के बावजूद काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
मछुआरा समुदाय के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए मत्स्य विभाग की ओर से कोई एनओसी जारी नहीं की गई है। उनका तर्क है कि इस तरह की मंजूरी के बिना निर्माण कार्य को कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इस मांग के साथ मछुआरा समुदाय ने परियोजना के मौजूदा काम पर रोक लगाने की मांग उठाई है।
मछुआरों के विरोध पर बीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मत्स्य विभाग इस प्रकार की परियोजनाओं के लिए अलग से एनओसी जारी नहीं करता है। प्रशासन के अनुसार, ऐसी परियोजनाओं में सरकारी प्रस्ताव में निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना आवश्यक होता है। इनमें से अधिकांश शर्तें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) के नियमों के तहत पहले से निर्धारित मंजूरियों से संबंधित हैं।
बीएमसी प्रशासन का कहना है कि जिन क्षेत्रों में मछली पकड़ने के पारंपरिक क्षेत्र सीधे प्रभावित होते हैं, वहां पर्यावरण संबंधी प्रावधानों और कानूनी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि परियोजना पर काम निर्धारित नियमों और कानूनी औपचारिकताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जा रहा है।
दूसरी ओर, स्थानीय मछुआरों को आशंका है कि 200 मिलियन लीटर प्रति दिन क्षमता वाला यह बड़ा डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट उनके मछली पकड़ने के व्यवसाय और समुद्र की प्राकृतिक बनावट को प्रभावित कर सकता है। उनका मानना है कि इसके चलते पारंपरिक मछली पकड़ने की गतिविधियों पर असर पड़ने के साथ उनकी आजीविका भी खतरे में आ सकती है।
बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि मुंबई की भविष्य की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मनोरी डिसेलिनेशन प्लांट बेहद जरूरी है। प्रशासन के अनुसार, परियोजना को सभी कानूनी औपचारिकताओं और निर्धारित शर्तों के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, मत्स्य विभाग की एनओसी को लेकर उठे सवालों और निर्माण कार्य रोकने की मांग के बीच बीएमसी प्रशासन तथा स्थानीय कोळी समाज के बीच तनातनी बनी हुई है। अब इस परियोजना को लेकर मछुआरा समुदाय की आपत्तियों और प्रशासन के स्पष्टीकरण के बीच विवाद केंद्र में आ गया है।

