मानसून सत्र का पहला दिन: विपक्ष का आक्रामक प्रदर्शन, कर्जमाफी पर सरकार को घेरा
महाराष्ट्र मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने 'पूर्ण कर्जमुक्ति' की मांग को लेकर विधान भवन की सीढ़ियों पर किया जोरदार प्रदर्शन। किसानों से किए गए वादों पर सरकार को घेरा, साथ ही दी उग्र आंदोलन की चेतावनी। क्या यह गतिरोध सत्र को और गरमाएगा?

महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले ही दिन विधान भवन का परिसर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मचे राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गया। सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी महाविकास अघाड़ी के विधायकों ने विधान भवन की सीढ़ियों पर एकत्रित होकर सरकार के विरुद्ध प्रचंड प्रदर्शन किया। 'नको अटी, नको शर्ती, आम्हाला पाहिजे कर्जमुक्ती' (शर्तें नहीं, शर्तें मंजूर नहीं, हमें चाहिए कर्जमुक्ति) के गगनभेदी नारों के साथ विपक्ष ने सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात करने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदर्शन की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सत्र की पूर्वसंध्या पर मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित पारंपरिक चायपान कार्यक्रम का विपक्ष ने पूर्णतः बहिष्कार किया था।
विपक्ष ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पूर्व मुख्यमंत्री ने किसानों का 'सातबारा' कोरा करने का जो वादा किया था, वह कोरी घोषणा साबित हुआ है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य अंबादास दानवे ने मीडिया से चर्चा करते हुए सरकार की कर्जमाफी योजना को 'फसवणूक' (धोखाधड़ी) करार दिया। दानवे ने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर केवल आगामी विधान परिषद चुनावों की रणनीतिक जोड़-तोड़ में व्यस्त है। उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र दौरे पर सत्तापक्ष की बयानबाजी का खंडन करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दौरा पूरी तरह से नियोजित था और इसका पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की फूट या सांसदों के पाला बदलने से कोई लेना-देना नहीं है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरे में लिया। उन्होंने पूर्व में किए गए अन्नत्याग आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि सरकार ने पंढरपुर में दिए गए अपने वचनों को तोड़कर राज्य के अन्नदाताओं के साथ धोखा किया है। पवार ने आरोप लगाया कि 'छत्रपति शिवाजी महाराज कर्जमाफी योजना' में जानबूझकर अत्यंत पेचीदा और कठोर शर्तें शामिल की गई हैं, ताकि सामान्य किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह जाएं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि ये शर्तें तत्काल प्रभाव से नहीं हटाई गईं, तो विपक्ष पूरे महाराष्ट्र में उग्र 'रास्ता रोको' आंदोलन छेड़ेगा, जिसका परिणाम सरकार के लिए गंभीर हो सकता है। मानसून सत्र के पहले दिन हुए इस हंगामे ने राज्य की राजनीति में बढ़ते तनाव को स्पष्ट कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और अधिक तीखी होने के संकेत मिल रहे हैं।

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