गणेशोत्सव 2026: पीओपी मूर्तियों पर तत्काल प्रतिबंध के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में पक्ष रखेगी महाराष्ट्र सरकार
गणेशोत्सव 2026 से पहले महाराष्ट्र सरकार पीओपी मूर्तियों पर तत्काल प्रतिबंध का विरोध करेगी। बॉम्बे हाई कोर्ट में सरकार पर्यावरण और मूर्तिकारों के हितों का पक्ष रखेगी।

तस्वीर में मुंबई के समुद्र तट पर गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और भगवान गणेश की बड़ी मूर्तियां दिखाई दे रही हैं।
मुंबई। आगामी गणेशोत्सव 2026 से पहले महाराष्ट्र सरकार ने पीओपी से बनने वाली गणेश मूर्तियों को लेकर महत्वपूर्ण नीतिगत रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के अनुरूप पर्यावरण के अनुकूल शाडू की मूर्तियों के उपयोग को बढ़ावा देने और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन इस वर्ष से पीओपी मूर्तियों पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध लगाने का विरोध करेगी।
जानकारी के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार अपना यह रुख आधिकारिक तौर पर अदालत के समक्ष रखेगी। हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में सरकार की इस रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।
गौरतलब है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा मई 2020 में जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें पीओपी से बनने वाली गणेश मूर्तियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि पानी में आसानी से न घुलने के कारण पीओपी की मूर्तियां जल निकायों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
इसके जवाब में महाराष्ट्र सरकार अदालत को बताएगी कि सीपीसीबी के दिशा-निर्देश केवल परामर्शात्मक हैं और वे कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं हैं। सरकार यह भी दलील देगी कि अचानक प्रतिबंध लागू करने से राज्य के हजारों मूर्तिकारों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इस वर्ष गणेशोत्सव 14 सितंबर से 25 सितंबर तक मनाया जाना तय है। सरकार अदालत को यह भी बताएगी कि त्योहार के लिए अधिकांश मूर्तिकार महीनों पहले ही पीओपी की मूर्तियों का निर्माण पूरा कर चुके हैं। ऐसे में ऐन वक्त पर प्रतिबंध लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा और इससे मूर्तिकारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
राज्य सरकार अपने पक्ष में यह भी रखेगी कि पिछले कुछ वर्षों में जल प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। वर्तमान में राज्य की लगभग 98 प्रतिशत पीओपी मूर्तियों का विसर्जन प्राकृतिक जलाशयों के बजाय बीएमसी द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाबों में किया जाता है, जिससे नदियों और समुद्र के प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार हाई कोर्ट से अनुरोध करेगी कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मूर्तिकारों के हितों को भी ध्यान में रखते हुए इस वर्ष पीओपी मूर्तियों की बिक्री और उपयोग की अनुमति दी जाए। यह मामला आगामी गणेशोत्सव से पहले पर्यावरणीय संतुलन और हजारों मूर्तिकारों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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