मुंबई। राज्य में लंबित ई-चालान के बढ़ते बोझ से परेशान वाहन चालकों को राहत देने के लिए परिवहन विभाग ने राज्य सरकार के समक्ष दंडमाफी के साथ ‘अभय’ योजना लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत लंबित ई-चालान के दंड की राशि में लगभग 50 प्रतिशत तक छूट देने का सुझाव दिया गया है।

भारी बकाया और आर्थिक दबाव

परिवहन विभाग के अनुसार राज्य में बड़ी संख्या में वाहन चालकों पर ई-चालान का भारी बकाया है। कई मामलों में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का दंड लंबित है, जिससे वाहन चालकों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विभाग ने बकाया दंड के निपटारे के लिए विशेष योजना तैयार की है। प्रस्ताव के अनुसार लंबित ई-चालान के दंड की राशि में 50 प्रतिशत तक छूट दी जा सकती है। इसके अलावा यदि वाहन चालक 90 दिनों के भीतर दंड का भुगतान करते हैं तो अतिरिक्त रियायत देने का भी सुझाव है। साथ ही पुराने लंबित दंड और नए दंड के निपटारे के लिए अलग-अलग व्यवस्था करने का विचार भी रखा गया है।

सरकारी खजाने और वसूली पर प्रभाव

सूत्रों के अनुसार राज्य में ई-चालान से संबंधित कुल बकाया राशि लगभग 5000 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है। यदि 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है तो राज्य सरकार को लगभग ढाई हजार करोड़ रुपये की राशि छोड़नी पड़ सकती है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस योजना से बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निपटारा हो सकेगा और वाहन चालक दंड का भुगतान करने के लिए आगे आएंगे। यह योजना विशेष रूप से नगर परिषद, नगर पंचायत और महानगरपालिका क्षेत्रों में मालवाहक तथा अन्य वाहन चालकों को ध्यान में रखकर प्रस्तावित की गई है। परिवहन विभाग का कहना है कि इससे वाहन चालकों पर पड़ा आर्थिक दबाव कम होगा और लंबित दंड की वसूली भी संभव हो सकेगी।

सरकार का रुख और कैबिनेट का निर्णय

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि "ई-चालान के लंबित दंड और प्रस्तावित अभय योजना के संबंध में राज्य सरकार के समक्ष प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा।"

आंदोलन और भविष्य की रणनीति

उल्लेखनीय है कि ई-चालान के मुद्दे को लेकर राज्य के वाहन चालकों ने पिछले चार महीनों से राज्यव्यापी आंदोलन किया था। परिवहन मंत्री की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। वाहन चालकों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उनके हित में निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।

Pratahkal Bureau

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