मुंबई के महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में ७७वें गणतंत्र दिवस की धूम: देशभक्ति के रंग में रंगा पूरा परिसर
मुंबई के महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल ने ७७वां गणतंत्र दिवस देशभक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया। समारोह में समीर वकिलवाला, नितिन तड़ाके और फाउंडेशन के पदाधिकारियों की उपस्थिति में ध्वजारोहण हुआ। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अतिथियों के प्रेरणादायक भाषणों ने संविधान के मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता फैलाई।

मुंबई। सपनों के शहर मुंबई के कालबादेवी क्षेत्र में स्थित महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल ने ७७वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रभक्ति की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर देखने वाले का मन मोह लिया। तिरंगे की आन-बान और शान के बीच, विद्यालय प्रांगण में हर्षोल्लास का ऐसा वातावरण बना कि चारों ओर बस 'जय हिंद' के स्वर गूंजते रहे। यह समारोह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण जगाने वाला एक भव्य अनुष्ठान साबित हुआ।
समारोह का विधिवत शुभारंभ एक गरिमामयी ध्वजारोहण समारोह के साथ हुआ। मुख्य अतिथि समीर वकिलवाला, माणक धींग और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नितिन तड़ाके ने स्कूल के सम्मानित ट्रस्टीगणों की उपस्थिति में तिरंगा फहराया। इस गौरवशाली क्षण में आचार्य महाप्रज्ञ विद्या निधि फाउंडेशन के शीर्ष पदाधिकारी भी शामिल रहे, जिनमें कार्याध्यक्ष गणपत लाल डागलिया, उपाध्यक्ष सुमेर सुराणा, रमेश मेहता, महामंत्री लक्ष्मीलाल डागलिया, चैयरमेन डॉ. एस. के. जैन और अन्य ट्रस्टीगणों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आगाज विद्यार्थियों द्वारा नवकार मंत्र के मधुर उच्चारण से हुआ। इसके उपरांत, छात्रों ने स्वागत गीत और एक प्रेरणादायक चलचित्र प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। विद्यालय के चेयरमैन डॉ. एस. के. जैन ने अपने संबोधन में राष्ट्र के प्रति भावों की सुंदर अभिव्यक्ति दी। मुख्य अतिथि ने विद्यालय के शैक्षणिक स्तर और छात्रों के आचरण की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि महाप्रज्ञ स्कूल के बच्चे मेहनत, अनुशासन और एकता का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने बच्चों के व्यवहार और सीखने की प्रबल इच्छाशक्ति को राष्ट्र के लिए गौरव का विषय बताया।
विशिष्ट अतिथि माणक धींग ने अपने ओजस्वी संबोधन में भारतीय संविधान की मूल भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को न केवल उनके मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में कर्तव्यों के निर्वहन की भी सीख दी। इसी कड़ी में निर्देशिका डॉ. वनीता मनसुखानी ने अनुशासन की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि कर्तव्यों के प्रति सजगता ही एक छात्र को सफल इंसान बनाती है। प्रधानाचार्या सरोज माचाड़ो ने स्वतंत्र भारत के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान परिप्रेक्ष्य पर प्रभावशाली विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में छात्रा निरोशा आचार्य ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के सामूहिक गायन के साथ यह ऐतिहासिक समारोह संपन्न हुआ।

Pratahkal Bureau
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