KEM अस्पताल में आधी रात छापेमारी, इलाज में देरी और स्टाफ की गैरहाजिरी पर उठे सवाल
मुंबई के KEM अस्पताल में BMC स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष हरीश भांडिरगे के आधी रात औचक निरीक्षण के बाद इलाज में देरी, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप सामने आए हैं, जिस पर जांच की मांग की गई है।

तस्वीर में बीएमसी स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांडिरगे केईएम अस्पताल में अस्पताल प्रशासन और स्टाफ से बातचीत करते हुए दिख रहे हैं।
मुंबई के केईएम अस्पताल में मरीजों की देखभाल और अस्पताल प्रशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांडिरगे ने गुरुवार देर रात नागरिक संचालित इस अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कथित तौर पर मरीजों के इलाज में देरी, ड्यूटी पॉइंट पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मरीजों के परिजनों से खराब संवाद जैसी कई खामियां सामने आने का दावा किया।
भांडिरगे की ओर से जारी बयान के अनुसार, निरीक्षण में आपातकालीन उपचार में लंबे समय तक देरी, निर्धारित ड्यूटी स्थानों से डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मरीजों के रिश्तेदारों के साथ संवाद की कमी सामने आई। उन्होंने मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की बात कही है।
करीब 10 घंटे तक भर्ती के लिए इंतजार करने का आरोप
यह निरीक्षण एक शिकायत के बाद किया गया, जिसमें एक मरीज को लेकर अस्पताल की कैजुअल्टी विभाग में देरी का आरोप लगाया गया था। बयान के मुताबिक, मरीज को गुरुवार सुबह करीब 11 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन उसकी भर्ती प्रक्रिया रात करीब 10.30 बजे शुरू हुई। इस वजह से मरीज को करीब 10 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
भांडिरगे ने दावा किया कि जब उन्होंने देरी की जानकारी लेने के लिए अस्पताल के चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें बताया गया कि अस्पताल के कर्मचारियों को जनप्रतिनिधियों के फोन या संदर्भ स्वीकार नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रतिक्रिया जवाबदेही की अनदेखी को दर्शाती है और इससे मरीजों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
आधी रात निरीक्षण में इलाज प्रक्रिया और स्टाफ व्यवस्था पर सवाल
फोन पर हुई बातचीत के बाद भांडिरगे ने स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लेने के लिए रात करीब 12 बजे केईएम अस्पताल का दौरा किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने कथित तौर पर पाया कि कैजुअल्टी विभाग में मरीजों को शुरुआती जांच के लिए भी दो घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा था।
बयान के अनुसार, जांच कक्षों में तैनात रहने वाले डॉक्टर कथित तौर पर अपनी जगह पर मौजूद नहीं थे। वहीं, बुलाए जाने के बावजूद असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर्स (AMOs) के पहुंचने में काफी समय लगा।
बयान में यह भी कहा गया कि कुछ कर्मचारियों ने बताया कि वे निजी मोबाइल कॉल का जवाब नहीं देते और जनप्रतिनिधियों के फोन भी स्वीकार नहीं करते।
डीन ने बढ़ते मरीज भार का दिया हवाला
रात करीब 1.30 बजे केईएम अस्पताल के डीन डॉ. हरीश पाठक के साथ हुई चर्चा में मरीजों की बढ़ती संख्या और उपलब्ध चिकित्सा कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव का मुद्दा उठाया गया।
बयान के मुताबिक, भांडिरगे ने नागरिक अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को स्वीकार किया, लेकिन यह भी कहा कि मरीजों की बढ़ती संख्या को सेवा में कमी का कारण नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने मरीजों की देखभाल प्रभावित न हो, इसके लिए बेहतर योजना, पर्याप्त स्टाफ और मजबूत प्रशासनिक जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।
जांच और सुधारों की मांग
भांडिरगे ने कथित लापरवाहियों की विस्तृत जांच की मांग की है और अस्पताल प्रशासन से जिम्मेदारी तय करने को कहा है। उन्होंने आपातकालीन विभाग की कार्यप्रणाली की तत्काल समीक्षा, जरूरत के अनुसार अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों की तैनाती और मरीजों के मार्गदर्शन एवं संवाद व्यवस्था में सुधार की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि नगर निगम के अस्पताल लाखों नागरिकों के लिए जीवनरेखा हैं और प्रत्येक मरीज समय पर, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का हकदार है। उन्होंने चेतावनी दी कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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