कांजूरमार्ग डंपिंग ग्राउंड: बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने किया निरीक्षण
आयुक्त ने कचरा निस्तारण प्रक्रिया का जायजा लेकर अधिकारियों को वैज्ञानिक तकनीकों और मिस्टिंग प्रणाली के जरिए दुर्गंध रोकने के सख्त निर्देश दिए।

कांजूरमार्ग स्थित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना स्थल पर मानचित्र के माध्यम से कचरा निस्तारण प्रक्रिया की समीक्षा करतीं बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे और साथ में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी।
मुंबई के कांजूरमार्ग स्थित नागरिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना से उठने वाली तीव्र दुर्गंध अब स्थानीय निवासियों के लिए दुस्वप्न नहीं बनेगी। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की आयुक्त अश्विनी भिडे ने आज तड़के इस विशाल परियोजना स्थल का औचक निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। लगभग डेढ़ घंटे तक चले इस सघन दौरे के दौरान आयुक्त ने कचरा निस्तारण की संपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया का सूक्ष्मता से अवलोकन किया और कार्यक्षमता में वृद्धि करने सहित दुर्गंध पर पूर्ण नियंत्रण पाने के लिए उपस्थित अधिकारियों को बेहद सख्त निर्देश जारी किए। बीएमसी प्रशासन का मुख्य ध्येय आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से कचरा प्रबंधन को इस स्तर पर लाना है कि कांजूरमार्ग, विक्रोली और पवई जैसे आसपास के घने रिहाइशी क्षेत्रों के नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के क्रम में आयुक्त अश्विनी भिडे ने कचरा पृथक्करण केंद्र, खाद निर्माण संयंत्र, बायोगैस से विद्युत उत्पादन केंद्र और बायो-रिएक्टर लैंडफिल का विस्तृत मुआयना किया। उन्होंने विशेष रूप से उस 'मिस्टिंग' प्रणाली की समीक्षा की, जिसके अंतर्गत वर्तमान में 11 चिन्हित स्थानों पर सुगंधित द्रव्यों और 'बायो-एंजाइम' का छिड़काव किया जाता है ताकि कचरे की दुर्गंध हवा के जरिए फैलने से रोकी जा सके। इसके अतिरिक्त, आयुक्त ने दुर्गंध संबंधी शिकायतों के समाधान हेतु जारी हेल्पलाइन नंबर की कार्यप्रणाली की भी जांच की। वर्तमान में 118.14 हेक्टेयर में विस्तृत इस वृहद प्रकल्प में प्रतिदिन लगभग 5,200 टन कचरे का बायो-रिएक्टर तकनीक से और 1,000 टन कचरे का खाद निर्माण तकनीक से वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है।
आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए कि कचरे के ढेरों को मिट्टी की मोटी परतों से ढकने का कार्य निरंतर और समयबद्ध तरीके से किया जाए, जिससे मीथेन गैस का उत्सर्जन रुके और दुर्गंध का हवा से संपर्क पूरी तरह विच्छेदित हो सके। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना से उत्पादित बिजली का उपयोग इसी परिसर की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय कदम है। इस महत्वपूर्ण दौरे में उपायुक्त प्रशांत गायकवाड और किरण दिघावकर सहित बीएमसी के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। स्थानीय नगरसेवकों ने आयुक्त के इस सक्रिय कदम का पुरजोर स्वागत किया है और विश्वास जताया है कि प्रशासन की इस सख्ती से क्षेत्र के नागरिकों को वर्षों से व्याप्त बदबू की समस्या से स्थायी मुक्ति मिलेगी।

Pratahkal Bureau
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