मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी में एक के बाद एक वित्तीय अपराधों के खुलासे से सनसनी फैल गई है। एक ओर जहां करीब 36 लाख रुपये के शुद्ध सोने का गबन कर एक जूलरी कारोबारी से ठगी का मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर सीजीएसटी अधिकारियों ने 37 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस घोटाले में दो कंपनी निदेशकों को गिरफ्तार किया है। दोनों घटनाओं ने कारोबारी जगत में हड़कंप मचा दिया है।

पहले मामले में एल.टी. मार्ग पुलिस थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, भायखला निवासी एक जूलरी व्यापारी ने जुलाई माह में आरोपी मकबूल अब्दुल सुबूर एस. के. को 352 ग्राम शुद्ध सोना, जिसकी कीमत लगभग 36 लाख 60 हजार रुपये थी, आभूषण तैयार करने के लिए सौंपा था। मकबूल ने पंद्रह दिन में आभूषण बनाकर लौटाने का वादा किया, लेकिन समय बीतने के बाद वह फरार हो गया। शिकायतकर्ता ने कई बार उससे संपर्क करने की कोशिश की, पर उसका मोबाइल फोन बंद मिला। जब व्यापारी उसके घर पहुंचे तो वहां भी आरोपी का कोई पता नहीं चला। इसके बाद व्यापारी ने समझा कि आरोपी सोना लेकर भाग चुका है और तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। एल.टी. मार्ग पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया है।

दूसरी ओर, सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) मुंबई जोन के अधिकारियों ने 36.58 करोड़ रुपये के बड़े फर्जी इनवॉइस घोटाले का पर्दाफाश करते हुए दो कंपनी अधिकारियों—नीव इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जितेंद्र जैन और सागर एंटरप्राइजेज के प्रोप्राइटर मितेश जैन—को गिरफ्तार किया है।

अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों ने बिना किसी वस्तु या सेवा की वास्तविक आपूर्ति किए फर्जी जीएसटी इनवॉइस जारी और प्राप्त किए, ताकि अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ उठाया जा सके। जांच में सामने आया कि सागर एंटरप्राइजेज ने 36.58 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी लिया और 21.02 करोड़ रुपये का क्रेडिट विभिन्न संस्थाओं को पास किया, जिनमें से 11.98 करोड़ रुपये नीव इंफ्रास्ट्रक्चर को दिए गए। वहीं, नीव इंफ्रास्ट्रक्चर ने भी 13.48 करोड़ रुपये का गैर-प्रामाणिक आईटीसी लेकर 13.62 करोड़ रुपये अन्य कंपनियों को ट्रांसफर किया।

सीजीएसटी अधिकारियों का कहना है कि दोनों कंपनियों ने फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग कर अपने कारोबार का आंकड़ा बढ़ाया और अवैध लेनदेन को वैध दिखाने की कोशिश की। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन सी कंपनियां या व्यक्ति शामिल हैं।

इन दोनों मामलों ने वित्तीय जगत में विश्वास की नींव को हिला दिया है। एक तरफ छोटे स्तर पर सोने के गबन की ठगी और दूसरी ओर करोड़ों के जीएसटी घोटाले ने यह साफ कर दिया है कि आर्थिक अपराधों के विरुद्ध सख्त निगरानी और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हो गई है।

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Pratahkal Bureau

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