पनवेल में जैन समाज का मिलन सम्मेलन, एकता और संगठनात्मक मजबूती पर हुआ गहन मंथन
महाराष्ट्र के विभिन्न जैन संघों के प्रतिनिधियों का मिलन सम्मेलन पनवेल में श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषि मसा के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में संगठनात्मक मजबूती और एकता को बनाए रखने पर जोर दिया गया।

मुंबई। सामूहिकता की शक्ति और समाजिक एकता का अद्वितीय दृश्य पनवेल में तब देखने को मिला जब ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस मुंबई–पुणे प्रांत पंचम जोन, वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पनवेल और मेवाड़ श्रावक संघ के तत्वावधान में महाराष्ट्र के विभिन्न संघों का मिलन सम्मेलन आयोजित किया गया।
श्रमणसंघीय युवाचार्य महेन्द्र ऋषि मसा के पावन सान्निध्य में संपन्न इस सम्मेलन का उद्देश्य समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और संगठनात्मक मजबूती के लिए नए आयाम तलाशना रहा। युवाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमणसंघ केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे शरीर विभिन्न अंगों के सामंजस्य से जीवित और सक्रिय रहता है, उसी प्रकार श्रमणसंघ की भी शक्ति एकता और समरसता में निहित है।
सम्मेलन में उपस्थित कॉन्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष पारस मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ की एकता और अखंडता बनाए रखना हर सदस्य की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।
अविनाश चौरड़िया ने इस अवसर पर कहा कि श्रमणसंघ केवल संगठन भर नहीं, बल्कि एक परिवार है। परिवार की तरह ही समाज की प्रत्येक समस्या का समाधान आपसी समझ, संवाद और सहयोग से संभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतभेद को दूर कर सामूहिकता की भावना को मजबूत करना ही समय की सबसे बड़ी मांग है।
कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पिंटू कर्णावट ने भी समाज के सामने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि संघ के प्रत्येक सदस्य को आपसी सहयोग, परस्पर आदर और समर्पण की भावना बनाए रखनी चाहिए। यही भावनाएँ संघ को दीर्घकालीन मजबूती प्रदान करेंगी।
महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कॉन्फ्रेंस की पूर्व राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष रुचिरा सुराणा ने कहा कि महिलाओं का योगदान संघ की गतिविधियों में अनिवार्य है। उन्होंने नई पीढ़ी में नेतृत्व की भावना विकसित करने और सामाजिक चेतना को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस सम्मेलन में नितिन बेदमुथा, गणेश ओस्तवाल, प्रवीण लुणावत, विजय ओस्तवाल, पोपटलाल ओस्तवाल, विलास राठौड़, बालासाहेब धोका, सतीश लोढ़ा, दिलीप नाहर, जे.सी. भंडारी, मनोज मुथा, मेवाड़ संघ अध्यक्ष भैरूलाल लोढ़ा, फूलचंद नाहर, राजेंद्र ओस्तवाल, माणिकचंद दुगड़, देवीलाल वडाला, सागर सांखला, नितिन चोपड़ा, मनोहरलाल लोढ़ा, कल्पना कर्णावट, सुरेखा कटारिया और ज्योति गादिया सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और गणमान्यजन उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में चातुर्मास समिति के अध्यक्ष राजेश बांठिया, राजेंद्र बांठिया, नितिन मुनोत, संतोष मुनोत, शैलेन्द्र खेरोदिया, मनोज बांठिया, बिपिन मुनोथ, जयंती परमार, मदनलाल चपलोत, ललित चंडालिया, रणजीत कांकरेचा, अशोक बोहरा, शीतल बांठिया, महावीर सोलंकी, प्रकाश कर्नावट, जितेंद्र बालड़, रितेश मुनोत, विजय कुमठ, विजय श्रीमाल, रिखब बनवट, गौरव बांठिया, ऋषभ बांठिया और हस्तीमल कराड़ ने सक्रिय भूमिका निभाई।
सम्मेलन का वातावरण पूरी तरह से संवाद, चिंतन और प्रेरणा से परिपूर्ण रहा। उपस्थित सदस्यों ने माना कि ऐसे मिलन सम्मेलन न केवल सामाजिक भ्रांतियों को दूर करते हैं बल्कि संघ की एकजुटता को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।कार्यक्रम के समापन पर यह संकल्प दोहराया गया कि संघ की एकता और संगठन की मजबूती ही समाज की वास्तविक शक्ति है। सभी ने मिलकर इस बात पर सहमति जताई कि आपसी सहयोग और विश्वास की नींव पर ही भविष्य का मजबूत और समरस समाज खड़ा किया जा सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
