गुवाहाटी: अत्याधुनिक तकनीक से लैस हुआ पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, अब ध्वनि तरंगों से पकड़ी जाएगी कोचों की खामियां
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने गुवाहाटी कोचिंग डिपो में अत्याधुनिक 'फ्लूक ii905 एकॉस्टिक इमेजर' तकनीक पेश की है, जो एयर ब्रेक और बेलो लीकेज का सटीक पता लगाकर रेल सुरक्षा को अभेद्य बनाएगी। साथ ही, "वन डे वन कोच" पहल के जरिए कोचों का कायाकल्प कर यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। रेलवे की इस आधुनिक क्रांति की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

गुवाहाटी। भारतीय रेलवे के बेड़े में सुरक्षा और आधुनिकता के एक नए युग का सूत्रपात करते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने अपनी रखरखाव प्रणाली को हाई-टेक बना दिया है। यात्री सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए गुवाहाटी कोचिंग डिपो ने अपनी सिक लाइन और पिट लाइन पर अत्याधुनिक 'फ्लूक ii905 एकॉस्टिक इमेजर' (Fluke ii905 Acoustic Imager) तकनीक को तैनात किया है। यह कदम न केवल रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित बनाएगा, बल्कि कोचों के रखरखाव में लगने वाले समय और श्रम में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
रेलवे की इस नई कार्यप्रणाली में 'एकॉस्टिक इमेजर' एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है। यह उपकरण डीवी लीकेज, एयर बेलो और एयर ब्रेक पाइप में होने वाले सूक्ष्म से सूक्ष्म रिसाव का पता लगाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। विशेष बात यह है कि यह तकनीक दृश्य छवियों (Visual Images) पर एकॉस्टिक साउंड मैप को ओवरले करती है, जिससे कंप्रेशड एयर और गैस रिसाव का सटीक स्थान इंजीनियरिंग टीम की स्क्रीन पर उभर आता है। पारंपरिक तरीकों की तुलना में यह तकनीक न केवल सटीक और सुरक्षित है, बल्कि निदान की प्रक्रिया को अत्यंत समय-कुशल बनाती है, जिससे मानवीय चूक की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है।
तकनीकी उन्नयन के साथ-साथ गुवाहाटी सिक लाइन ने यात्री सुविधाओं में सुधार के लिए "वन डे वन कोच–इंटेंसिव" (One Day One Coach–Intensive) नामक एक अनूठी और महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। इस विशेष अभियान के तहत प्रतिदिन एक कोच का व्यापक कायाकल्प या ओवरहॉलिंग किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में कोच की बाहरी पेंटिंग से लेकर यात्री सुविधाओं के फिटमेंट तक हर बारीकी पर ध्यान दिया जा रहा है। कोचों के भीतर बर्थ की रेक्सिन बदलने, लिनेन भंडारण की मरम्मत करने और शौचालयों में नए ईपीपीएफ सिलेंडर स्थापित करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए नए डस्टबिन और साइड मिरर भी लगाए जा रहे हैं। वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार, इस विशेष पहल के अंतर्गत अब तक तीन कोचों का कायाकल्प सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे द्वारा अपनाई गई यह दोहरी रणनीति—एक ओर अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक और दूसरी ओर गहन स्वच्छता व सौंदर्यीकरण—भारतीय रेलवे की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जहाँ तकनीक और सेवा का संगम यात्रियों के सफर को सुखद और सुरक्षित बनाता है। गुवाहाटी से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में रेलवे के रखरखाव मानकों के लिए एक नया प्रतिमान स्थापित करेगी।

Pratahkal Bureau
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