मुंबई। तेरापंथ भवन, कांदिवली में आचार्य तुलसी के दीक्षा शताब्दी समारोह "गणाधिपते नमाम्यहं" का आयोजन अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक रूप में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुनि कुलदीप कुमार और मुनि मुकुल कुमार की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिष्ठित नमस्कार महामंत्र के संगान से हुई, जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

स्वागत भाषण तेरापंथी सभा कांदिवली मंत्री रतनलाल सिंघवी ने दिया। तत्पश्चात श्रावक-श्राविकाओं को तुलसी प्रबोध का संगान मीनाक्षी भूतोड़िया, अशोक हिरण, भारती सेठिया, पलक हिरण, तारा मुणोत, मनिष पिंचा, रेणु कोठारी, सीमा बाफना और वंदना सुराणा द्वारा करवाया गया।

इस अवसर पर मुनि कुलदीप कुमार ने दीक्षा के गहन आध्यात्मिक अर्थ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साधु बनना केवल एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि कई जन्मों की साधना और चिर संचित शुभ-संस्कारों की परिणति है। उन्होंने इसे इस उदाहरण से स्पष्ट किया कि कैसे लगातार गिरती छोटी-छोटी बूंदें अंततः घड़े को गीला कर देती हैं, उसी प्रकार दीक्षा भी दीर्घकालीन साधना का परिणाम है।

मुनि मुकुल कुमार ने आचार्य तुलसी के करिश्माई व्यक्तित्व और मानवता के प्रति उनके योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि उनके संयमित जीवन और अनुशासन ने लाखों लोगों के उद्धार का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बताया कि आचार्य तुलसी ने समाज में अनुशासन, ज्ञान और नैतिक मूल्य स्थापित कर नए विकास के द्वार खोले।

मुंबई सभा अध्यक्ष माणक धींग ने कहा कि आचार्य तुलसी द्वारा दिए गए आध्यात्मिक और नैतिक आयामों को अपने जीवन में उतारना सभी श्रद्धालुओं का कर्तव्य है। तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के पूर्व मंत्री प्यारचंद मेहता ने आचार्य तुलसी के जीवन दर्शन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया, जिसने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को अत्यंत प्रेरित किया।

कार्यक्रम में माणकचंद रूपचंद दूगड़ चैरिटेबल ट्रस्ट, सोहनलाल मेघराज अजित धाकड़ और चंचल देवी विनोद कुमार बोहरा का सम्मान किया गया। संचालन तेयुप कांदिवली अध्यक्ष राजेंद्र दुगड़ ने किया। इस भव्य आयोजन में तेरापंथ सभा मुंबई के मंत्री दिनेश सुतरीया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्यारचंद मेहता, फाउंडेशन मंत्री जगदीश परमार, भगवती लाल धाकड़, जवरी मल नौलखा, राकेश सिंघवी, रोशनलाल मेहता, महिला मंडल अध्यक्ष निर्मला कोठारी, अल्का पटावरी और मधु श्यामसुखा का विशेष योगदान रहा। आभार ज्ञापन तेरापंथी सभा मालाड मंत्री सुरेश धोका ने किया।

यह समारोह न केवल आचार्य तुलसी के जीवन और शिक्षाओं को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि उनकी दीक्षा और अनुशासन की शिक्षाओं को वर्तमान समाज में उतारने की प्रेरणा भी प्रदान करता है।

Pratahkal Bureau

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