मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद भारत में सोने की मांग में कोई गिरावट नहीं आई है। जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में सोने का आयात 172 प्रतिशत बढ़कर 165 टन तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में आयात केवल 60 टन था।

आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अक्टूबर में विदेशों से कुल 14.72 बिलियन डॉलर मूल्य का सोना खरीदा, जो पिछले साल के मुकाबले 200 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच सोने की कीमतों में 25 प्रतिशत की वृद्धि ने आयात बिल में इस तेज उछाल को जन्म दिया।

सोने के साथ-साथ चांदी के आयात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अक्टूबर में चांदी के आयात में 77.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल आयात 110 टन तक पहुंचा। हालांकि, निर्यात की स्थिति कमजोर रही। अक्टूबर में सोने और चांदी के निर्यात में 29.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे स्पष्ट हुआ कि अधिकतर आयातित धातुएं घरेलू मांग को पूरा करने में उपयोग हो रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग में यह उछाल मुख्य रूप से त्योहारी और विवाह के सीजन के कारण आया। वहीं, कुछ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापारिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव के चलते वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव देखा गया।

वर्ष 2025 के पहले सात महीनों में सोने का कुल आयात 472.53 टन रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 461.85 टन था। जीजेईपीसी के चेयरमैन किरीट भंसाली ने बताया कि सरकार की एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन, क्रेडिट गारंटी योजना और आरबीआई के व्यापार राहत उपाय छोटे निर्यातकों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत मध्य पूर्व, लैटिन अमेरिका, कंबोडिया और वियतनाम जैसे नए बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

भंसाली ने यह स्पष्ट किया कि ट्रेड डेलीगेशन, मार्केटिंग पहल और नए निर्यात अवसर दीर्घकालिक साझेदारियों को मजबूत करने में मदद करेंगे। इस प्रकार, घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रयासों के मिश्रण ने भारत के बहुमूल्य धातु बाजार की मजबूती को दर्शाया है।

Pratahkal Bureau

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