मुंबईवासियों के लिए यातायात का सुनहरा सपना मानी जाने वाली गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना फिलहाल स्थानीय नागरिकों के लिए खौफ का पर्याय बन गई है। इस महत्वाकांक्षी निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की घोर अनदेखी का मामला अब तूल पकड़ चुका है। हाल ही में संपन्न हुई स्थायी समिति की बैठक में भाजपा नगरसेविका प्रीति साटम ने इस गंभीर लापरवाही को पुरजोर तरीके से उजागर करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। साटम ने मेट्रो स्लैब गिरने जैसी विगत हृदयविदारक घटनाओं का स्मरण कराते हुए चेतावनी दी कि फिल्म सिटी रोड जैसे अत्यधिक व्यस्त क्षेत्रों में बिना किसी सुरक्षा घेरे के रखे गए विशालकाय और भारी-भरकम गर्डर भविष्य में किसी भी क्षण जानलेवा साबित हो सकते हैं।

प्रोजेक्ट साइट की विचलित करने वाली वास्तविक तस्वीरें प्रस्तुत करते हुए नगरसेविका ने जमीनी हकीकत बयां की, जहाँ चारों ओर मलबे का अंबार लगा है, सड़कों की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है और जगह-जगह जलजमाव वाले गड्ढे संक्रामक बीमारियों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। साटम ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी और ठेकेदार आम जनता की सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रखकर कार्य कर रहे हैं। इस निर्माण स्थल के नीचे से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं, किंतु वहां सुरक्षा नेट अथवा उचित बैरिकेडिंग का नामोनिशान तक नहीं है। इस विषय पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने प्रशासन से विस्तृत जानकारी तलब की है और लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। प्रशासन से यह भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि निरंतर मिल रही शिकायतों के बावजूद दोषी ठेकेदारों पर अब तक भारी जुर्माना क्यों नहीं लगाया गया है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो विकास की यह राह विनाश का कारण बन सकती है।

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