मुंबई के घाटकोपर में 'उल्लास' कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहाँ साध्वी निर्वाणश्री ने जीवन को तनावमुक्त और आनंदमय बनाने के गूढ़ रहस्य साझा किए। क्या आप जानते हैं कि नकारात्मकता से दूर होकर वास्तविक खुशी कैसे पाई जाए? जानें इस विशेष कार्यशाला की मुख्य बातें।

मुंबई के घाटकोपर में आयोजित ‘उल्लास’ कार्यशाला ने उपस्थित जनों को जीवन को भार के बजाय उत्सव बनाने की नई दृष्टि प्रदान की। साध्वी निर्वाणश्री ठाणा-6 के पावन सानिध्य में संपन्न इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य जीवन में सकारात्मकता और शांति के महत्त्व को रेखांकित करना था। इस अवसर पर साध्वी निर्वाणश्री ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि जिस प्रकार देह के लिए प्राण आवश्यक हैं, उसी प्रकार जीवन के लिए उल्लास अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि आनंद विहीन जीवन उपहार नहीं, बल्कि एक बोझ के समान हो जाता है। वास्तविक आनंद की प्राप्ति के लिए नकारात्मक भावों से ऊपर उठना और वाद-विवाद, मोबाइल व टेलीविजन जैसे विचलनों से दूरी बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि जीवन में संवादिता का होना ही शांति का आधार है।


कार्यशाला के दौरान प्रबुद्ध साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने उल्लास को निरंतर बनाए रखने के लिए शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक फिटनेस को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि शरीर का निरोगी होना, मन का तनावमुक्त रहना और भावनात्मक स्वास्थ्य ही जीवन में हर पल प्रसन्नता बनाए रखने की कुंजी है। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसके बाद मंजू बड़ाला ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान साध्वी योगक्षेमप्रभा, साध्वी लावण्यप्रभा, साध्वी कुंदन यशा, साध्वी मुदितप्रभा और साध्वी मधुरप्रभा ने सामूहिक रूप से 'अब भोर सुहानी आए' गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यशाला में उपस्थित साधकों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के पश्चात साध्वीश्री ने कायोत्सर्ग का प्रयोग भी करवाया। कार्यक्रम के अंत में कुमुद कच्छारा ने अपने विचार व्यक्त किए और मंत्री नीतू डांगी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया। यह कार्यशाला जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और मानसिक शांति की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुई।

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