घाटकोपर के सुधा पार्क में जैन संतों का आगमन, गुरु भक्ति और सेवा का दिया संदेश
मुंबई के घाटकोपर में उप प्रवर्तक विनय मुनी और गौतम मुनी सहित अन्य जैन संतों के विहार आगमन पर समाजबंधुओं ने भव्य अगवानी की, जहां प्रवचन में एकाग्र भक्ति का महत्व बताया गया।

मुंबई के घाटकोपर स्थित सुधा पार्क में जैन संतों के विहार आगमन के दौरान आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में उपस्थित दिलीप पगारिया, महेन्द्र पगारिया सहित अन्य समाजबंधु और श्रावक-श्राविकाएं।
मुंबई के घाटकोपर स्थित सुधा पार्क में उस समय आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया, जब उप प्रवर्तक विनय मुनी “वागिश”, उप प्रवर्तक गौतम मुनी मसा, संजय मुनी मसा, सागर मुनी मसा और धैर्य मुनी मसा विहार करते हुए यहां पहुंचे। संतों के आगमन पर दिलीप पगारिया और महेन्द्र पगारिया के नेतृत्व में समाजबंधुओं ने भव्य आगवानी की। इसके बाद जैन मंदिर परिसर में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
प्रवचन के दौरान उप प्रवर्तक विनय मुनी मसा ने कहा कि जो व्यक्ति गुरु भगवंतों के प्रति अटूट भक्ति रखता है और माता-पिता की श्रवण कुमार जैसी सेवा करता है, उसका जीवन वास्तव में सार्थक बन जाता है। उन्होंने कहा कि आज से ग्यारह लाख वर्ष पूर्व श्रवण कुमार ने जिस प्रकार अपने माता-पिता की सेवा और उनकी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था, उसी सेवा भावना को आज भी संसार श्रद्धा और आदर के साथ स्मरण करता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुरु भगवंतों और माता-पिता के प्रति सेवा, समर्पण और आज्ञापालन की भावना रखनी चाहिए, क्योंकि माता-पिता का उपकार जीवन में कभी भी चुकाया नहीं जा सकता।
उप प्रवर्तक गौतम मुनी मसा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि प्रभु को प्राप्त करना है और प्रभु के साक्षात दर्शन करने हैं, तो मनुष्य और भगवान के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भक्त की भक्ति है। उन्होंने कहा कि यदि भक्ति में सच्ची शक्ति और समर्पण हो, तो भक्त प्रभु को अपने समक्ष प्रकट कर सकता है और उनके दर्शन प्राप्त कर सकता है। उन्होंने स्थानीय संघ की गुरु अम्बेश और गुरु सौभाग्य मदन के प्रति श्रद्धा और भक्ति को अत्यंत प्रशंसनीय तथा अनुकरणीय बताया।
इसके पश्चात धैर्य मुनी मसा ने कहा कि कई व्यक्ति दिन-रात प्रभु और गुरु भगवान की भक्ति करते हैं, लेकिन फिर भी प्रभु के साक्षात दर्शन नहीं कर पाते। इसका मुख्य कारण मन की एकाग्रता का अभाव है। उन्होंने कहा कि यदि मन को पूर्ण एकाग्रता और समर्पण के साथ प्रभु भक्ति में लगाया जाए, तो प्रभु के दर्शन अत्यंत सहज और सरल हो जाते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण-सूरदास तथा मीरा-कृष्ण के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इतिहास में अनेक महान भक्त हुए हैं, जिन्होंने अपनी प्रभु भक्ति में स्वयं को पूर्णतः समर्पित कर प्रभु चरणों में अपना जीवन अर्पित किया और साक्षात प्रभु दर्शन प्राप्त किए। उन्होंने श्रद्धालुओं से मन की एकाग्रता के साथ प्रभु भक्ति का मार्ग अपनाने और प्रभु दर्शन को जीवन का लक्ष्य बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का मंगलाचरण संजय मुनी महाराज के मुखारविंद से सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पारस बाफना, दिनेश कोठारी, दिनेश पिपाडा, किशन मांडोत, विजय पगारिया, हिम्मत राका, मनिष साखंला, रिखबलाल सांखला, सुंदरलाल सांखला, विजय कोठारी, मुकेश सिंगवी, निमेश राठौड़, पारस पामेचा, मुकेश सांखला, संजय बोहरा, अनिल पगारिया, सुरेश सिंगवी, दिनेश सिंगवी, कमलेश सिंगवी, अनिल सियाल, मनोर सोनी, राजेश खरवाड़, पंकज खरवड़, प्रकाश कच्छारा, महावीर पगारिया, पंकज चंडालिया, सुरेश लोढ़ा, दिलीप बोहरा, शोकिन पामेचा और दीपेश चिपड़ सहित अनेक समाजबंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने गुरु भक्ति, मातृ-पितृ सेवा और एकाग्र प्रभु भक्ति के संदेश को श्रद्धालुओं के बीच गहराई से स्थापित किया।

Pratahkal Bureau
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