मुंबई में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 60 करोड़ रुपये की कथित आर्थिक धोखाधड़ी मामले में फंसे दंपति को विदेश जाने की अनुमति तभी मिलेगी, जब वे उतनी ही राशि नकद जमा करें या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक से 60 करोड़ की बैंक गारंटी प्रस्तुत करें। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि बिना इस शर्त के जारी लुकआउट सर्कुलर हटाया नहीं जा सकता।

राज कुंद्रा के पिता की गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए दंपति ने लंदन जाने की विशेष अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया था कि कुंद्रा के पिता दुर्लभ आयरन-अमोनिया डेफिशिएंसी से पीड़ित हैं, जिससे आंतरिक रक्तस्राव और सांस लेने में बेहद तकलीफ जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो रही हैं। डॉक्टरों ने उन्नत चिकित्सा प्रक्रियाओं—कैप्सूल एंडोस्कोपी या डबल-बैलून एंटरोस्कोपी—की सलाह दी है। इसी चिकित्सा आपातकाल को ध्यान में रखते हुए दंपति ने 20 जनवरी 2026 से पहले लंदन जाने की मांग की थी।

दंपति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने 60 करोड़ रुपये की पूरी राशि जमा करने का विरोध करते हुए कहा कि यात्रा केवल चिकित्सकीय कारणों से आवश्यक है, इसलिए व्यवहारिक विकल्प दिए जाएं। हालांकि, अदालत ने यह दलील खारिज कर दी और स्पष्ट कर दिया कि लुकआउट सर्कुलर हटाने के लिए वही दो विकल्प उपलब्ध हैं—राशि जमा करें या बैंक गारंटी दें।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। पिछले महीने शिल्पा और राज कुंद्रा ने इस कथित 60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित एफआईआर को ही रद्द करने की याचिका दायर की थी। साथ ही उन्होंने आग्रह किया था कि अंतिम सुनवाई तक पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने या दंडात्मक कार्रवाई से रोका जाए। शिकायतकर्ता दीपक कोठारी का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच दंपति ने उन्हें अपनी कंपनी ‘बेस्ट डील टीवी प्राइवेट लिमिटेड’ में 60 करोड़ रुपये निवेश करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन बाद में उस राशि का इस्तेमाल कथित तौर पर निजी लाभ और लग्जरी खर्चों में किया गया।

वहीं, दंपति ने अपनी याचिका में दावा किया है कि शिकायत झूठे तथ्यों पर आधारित है और इसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से पैसा वसूलने की नीयत से दर्ज कराया गया है। उनका कहना है कि निवेशक को हुआ नुकसान व्यावसायिक जोखिम का हिस्सा है, इसे आपराधिक धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।

अदालत का यह फैसला न केवल इस हाई-प्रोफाइल केस को और गंभीरता प्रदान करता है, बल्कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक सख्ती का एक महत्वपूर्ण संकेत भी देता है।

Pratahkal Newsroom

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