फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़: मुंबई में अंतरराष्ट्रीय टेलीमार्केटिंग ड्रग फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश
मुंबई क्राइम ब्रांच ने जोगेश्वरी (वेस्ट) में चल रहे अंतरराष्ट्रीय टेलीमार्केटिंग ड्रग फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया। फर्जी कॉल सेंटर के जरिए अमेरिकी नागरिकों को नकली वियाग्रा बेचने वाले आठ आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि मुख्य सरगना फरार है। पुलिस ने डिजिटल उपकरण जब्त कर फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है।

मुंबई। महानगर की क्राइम ब्रांच यूनिट-9 ने जोगेश्वरी (वेस्ट) में चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टेलीमार्केटिंग ड्रग फ्रॉड रैकेट को ध्वस्त कर एक संगठित ठगी नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर नकली वियाग्रा और अन्य दवाएं बेचने वाली यह गैंग महीनों से सक्रिय थी और करोड़ों की ठगी कर चुकी थी। पुलिस की इस कार्रवाई ने साइबर अपराध की दुनिया में हलचल मचा दी है।
सूत्रों से मिली गोपनीय सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच को पता चला कि केवनीपाड़ा, एसवी रोड, अंबोली क्षेत्र में ‘टीम ग्रैंड 9 सिक्योरिटी सर्विसेज एलएलपी’ नाम से एक कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहाँ कर्मचारी अमेरिकी लहजे में बातचीत कर खुद को वहां की दवा कंपनियों का प्रतिनिधि बताते थे। वे अमेरिकी नागरिकों से टेलीमार्केटिंग कॉल के जरिए संपर्क कर नकली वियाग्रा सहित विभिन्न दवाएं बेचते थे और उनके भुगतान लेकर गायब हो जाते थे। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि यह कॉल सेंटर लगभग छह से सात महीनों से सक्रिय था और बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक इस ठगी का शिकार बने।
इस ऑपरेशन के दौरान क्राइम ब्रांच ने मौके से आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान मोहम्मद आमिर इकबाल शेख, माहिर इकबाल पटेल, मोहम्मद शबीब मोहम्मद खलील शेख, मोहम्मद अयाज परवेज शेख, आदम एहसानुल्लाह शेख, आर्यन मुशफ्फिर कुरैशी, अमान अजीज अहमद शेख और हश्मत जामिल जरीवाला के रूप में हुई है। सभी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है ताकि नेटवर्क की गहराई तक जांच की जा सके।
मामले में प्रमुख सरगना मुजफ्फर शेख अपने साथी आमिर मणियार और अन्य सहयोगियों के साथ फरार है। क्राइम ब्रांच की टीमें इन्हें पकड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। पुलिस ने छापेमारी में कई लैपटॉप, हेडसेट, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। अधिकारियों का संदेह है कि आरोपियों ने अमेरिकी नागरिकों का निजी डेटा भी अवैध रूप से प्राप्त किया था। सभी डिजिटल उपकरणों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने लोगों को ठगा गया, आर्थिक नुकसान कितना हुआ और डेटा चोरी का दायरा कितना व्यापक है।
जांच अधिकारी यह भी परख रहे हैं कि क्या इस धोखाधड़ी नेटवर्क के तार देश के अन्य राज्यों या विदेशों तक फैले हुए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई न केवल एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि डिजिटल धोखाधड़ी के बदलते स्वरूप पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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Pratahkal Bureau
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