डोंबिवली में उपासक द्वय श्री अर्जुन मेड़तवाल एवं श्री गेहरीलाल बाफना के आगमन के बीच पर्वाधिराज पर्युषण का चतुर्थ दिवस ‘वाणी संयम दिवस’ के रूप में मनाया गया। उनके निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवक्ता उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने जीवन में सफलता के लिए वाणी के संयम को आवश्यक बताया।

उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने कहा कि प्रत्येक आदमी जीवन में सफलता का वरण करना चाहता है। सफलता के लिए कई गुणों की आवश्यकता रहती है, जिनमें से एक वाणी का संयम है। वाणी में संयम नहीं होने पर जीवन में अनेक प्रकार की दुविधाएं खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि वाणी के असंयम से दुनिया में अनेक युद्ध भी हुए हैं।



उन्होंने कहा कि वाणी का असंयम रखने वाला व्यक्ति न परिवार में प्रिय होता है और न समाज में प्रिय होता है। असंयमित वाणी दोस्त को भी दुश्मन बना देती है, जबकि वाणी की मधुरता और वाणी का संयम दुश्मन को भी दोस्त बना सकता है। इसलिए जब भी बोलें, मधुर बोलें और शब्दों को तोल-मोल कर बोलें।

सहयोगी उपासक गेहरीलाल बाफना ने कहा कि वाणी के संयम का मतलब यह नहीं है कि हम मौन धारण कर बैठ जाएं। वाणी के संयम का अर्थ है कि हम जब भी बोलें, अवसर देखकर बोलें और अनर्गल न बोलें। उन्होंने कहा कि शब्दों के घाव तलवार की धार से भी अधिक घाव करने वाले होते हैं।

उन्होंने कहा कि शब्द रूपी तीर एक बार मुंह से निकल जाता है तो फिर वापस लौटकर नहीं आता। वह सामने वाले व्यक्ति को घायल करता ही करता है। कार्यक्रम में तेरापंथी सभा, डोंबिवली के अध्यक्ष मदन कोठारी ने प्रासंगिक अभिव्यक्ति के साथ आवश्यक सूचनाएं दीं। इस दौरान पर्युषण के चतुर्थ दिवस पर वाणी के संयम को जीवन में सफलता और मधुर संबंधों के लिए आवश्यक बताया गया।

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