धारावी एसटीपी का 76% काम पूरा, मई 2027 तक मीठी नदी का प्रदूषण थमेगा
बीएमसी की मुंबई सीवेज डिस्पोजल परियोजना के तहत बन रहे इस प्लांट से प्रतिदिन 209 एमएलडी पुनर्चक्रित पानी गैर-पेयजल कार्यों के लिए उपलब्ध होगा।

धारावी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थल की समीक्षा करते बीएमसी अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर।
मुंबई में मीठी नदी के प्रदूषण पर अंकुश लगाने और पुनर्चक्रित पानी की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में धारावी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण निर्णायक चरण में पहुंच गया है। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की महत्वाकांक्षी मुंबई सीवेज डिस्पोजल परियोजना के तहत बन रहे इस केंद्र का 76 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब प्रशासन ने जुलाई 2027 की निर्धारित समयसीमा से पहले, मई 2027 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य तय किया है। इसके बाद जून 2027 से प्रतिदिन 209 मिलियन लीटर (एमएलडी) पुनर्चक्रित पानी गैर-पेयजल उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
धारावी में 418 एमएलडी क्षमता वाले इस अत्याधुनिक मलजल प्रक्रिया केंद्र का निर्माण तेजी से जारी है। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने परियोजना स्थल का दौरा कर नागरिक, यांत्रिक और विद्युत अभियांत्रिकी से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्माण की गति बढ़ाने और निर्धारित समय से पहले काम पूरा करने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।
मुंबई के मध्यवर्ती क्षेत्र में सीमित उपलब्ध जगह को ध्यान में रखते हुए इस विशाल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण विशेष बहुमंजिला इमारत के रूप में किया जा रहा है। परियोजना का काम 5 जुलाई 2022 को शुरू हुआ था। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता बापट नाला और सफेद पुल से मीठी नदी में सीधे पहुंचने वाले दूषित पानी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार करना है। इसके लिए जुड़वां सुरंग के माध्यम से गंदे पानी को मोड़कर धारावी स्थित प्रक्रिया केंद्र तक लाया जाएगा।
इस व्यवस्था से मीठी नदी में प्रतिदिन गिरने वाले लगभग 168 एमएलडी दूषित पानी को रोककर उसका वैज्ञानिक उपचार किया जा सकेगा। इससे नदी में प्रदूषण का स्तर कम करने और पानी की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
प्लांट में मलजल के उपचार के लिए 'सिक्वेंशियल बैच रिएक्टर' तकनीक अपनाई जाएगी। इसके तहत 418 एमएलडी पानी पर द्वितीय स्तर और 209 एमएलडी पानी पर तृतीय स्तर की प्रक्रिया की जाएगी। प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली बायोगैस से बिजली का उत्पादन भी किया जाएगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी।
अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने टनल के लॉन्चिंग शाफ्ट का निर्माण नवंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही परियोजना स्थल पर सुरक्षा दीवार के निर्माण और प्रभावितों के पुनर्वास की प्रक्रिया में भी तेजी लाने को कहा है। फिलहाल निर्माण स्थल पर प्रतिदिन 688 मजदूर और इंजीनियर कार्यरत हैं।
मई 2027 तक निर्माण पूरा होने के बाद जून से प्रतिदिन 209 एमएलडी पुनर्चक्रित पानी गैर-पेयजल कार्यों के लिए उपलब्ध होगा। इससे मुंबई में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ मीठी नदी के प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इस परियोजना की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

Pratahkal Bureau
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