धारावी बस डिपो जमीन विवाद: कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने बीएमसी पर साधा निशाना
धारावी बस डिपो की जमीन को लेकर मुंबई में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने बीएमसी प्रशासन पर अडानी समर्थित डेवलपर को जमीन सौंपने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया।

मुंबई महानगरपालिका में धारावी बस डिपो की जमीन को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर देने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुंबई महानगरपालिका में कांग्रेस गुट के नेता अशरफ आजमी ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए बीएमसी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अशरफ आजमी ने आरोप लगाया कि मुंबईकरों की बेशकीमती जमीन को अडानी समूह से कथित तौर पर जुड़े ‘मेसर्स नवदीप डेवलपर्स’ को सौंपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस प्रस्ताव का किसी भी कीमत पर समर्थन नहीं करेगी।
आजमी ने इससे पहले माहिम बस डिपो की जमीन निजी डेवलपर को दिए जाने के मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस डेवलपर ने महानगरपालिका को मिलने वाले ₹98 करोड़ का बकाया भुगतान अब तक नहीं किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उस जमीन की बाजार कीमत बढ़कर ₹400 से ₹500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जिससे बीएमसी को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि धारावी डिपो के मामले में ऐसी स्थिति दोहराने नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि धारावी डिपो की लगभग साढ़े ग्यारह एकड़ मूल्यवान जमीन को निजी हाथों में सौंपना जनता और प्रशासन दोनों के हित में नहीं है। आजमी ने धारावी पुनर्विकास परियोजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय निवासियों को मानखुर्द और गोवंडी जैसी जगहों पर स्थानांतरित करने की योजना को लेकर पहले से ही लोगों में अविश्वास और संदेह बना हुआ है। ऐसे समय में डिपो की इतनी बड़ी जमीन निजी डेवलपर को देना मुंबई की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने जैसा है।
कांग्रेस नेता ने मांग की कि यदि महानगरपालिका इस डिपो को किसी निजी भागीदार को देने के बजाय खुद विकसित करती है, तो इससे मनपा को बड़ा राजस्व प्राप्त हो सकता है और शहर के अन्य विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
बीएमसी प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए अशरफ आजमी ने कहा कि सदन में धारावी डिपो के व्यावसायिक विषय को लाने के बजाय चेंबूर में हुई गंभीर दुर्घटना पर संवेदनशील चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पालिका प्रशासन अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों और जनहित के मुद्दों से लगातार दूरी बना रहा है।
इसी रवैये के विरोध में कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया और धारावी बस डिपो की जमीन को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। अब यह मामला मुंबई महानगरपालिका की जमीनों के इस्तेमाल और सार्वजनिक हित को लेकर एक बड़े राजनीतिक विवाद के रूप में सामने आया है।

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