Colaba Football Ground Protest : दक्षिण मुंबई के कोलाबा इलाके में स्थित ऐतिहासिक सबिना चंद्रशेखर मैदान, जिसे स्थानीय स्तर पर 'बैक गार्डन' के नाम से जाना जाता है, इन दिनों प्रशासन और स्थानीय खिलाड़ियों के बीच खींचतान का केंद्र बन गया है। भारतीय फुटबॉल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी देने वाली इस 'नर्सरी' के अस्तित्व पर सौंदर्यीकरण की नई योजना ने सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय निवासियों और खेल प्रेमियों का आरोप है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर प्रशासन इस मैदान की मूल संरचना को नष्ट करने का प्रयास कर रहा है, जिससे यहाँ की फुटबॉल संस्कृति सदा के लिए समाप्त हो सकती है।

घटनाक्रम के अनुसार, नगर निगम प्रशासन ने इस मैदान के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था को सौंदर्यीकरण की अनुमति प्रदान की है। हालांकि, इस योजना के तहत मैदान की प्राकृतिक घास को हटाकर कृत्रिम घास (आर्टिफिशियल टर्फ) लगाने और मैदान के चारों ओर एक धावपट्टी (रनिंग ट्रैक) बनाने का निर्णय लिया गया है। खिलाड़ियों का कहना है कि यह विरोध सौंदर्यीकरण के खिलाफ नहीं, बल्कि जिस दोषपूर्ण पद्धति से इसे लागू किया जा रहा है, उसके विरुद्ध है। वर्तमान में कोलाबा में फुटबॉल के लिए कूपरेज और सबिना चंद्रशेखर ही दो प्रमुख मैदान हैं, जिनमें से कूपरेज मैदान में क्लब खिलाड़ियों का वर्चस्व है और वहां आम जनता का प्रवेश वर्जित है। ऐसे में, आम और उभरते खिलाड़ियों के लिए बैक गार्डन ही एकमात्र सहारा बचा है।

मैदान के तकनीकी पहलुओं पर चिंता व्यक्त करते हुए स्थानीय कोचों और विशेषज्ञों का कहना है कि धावपट्टी के निर्माण से मैदान का क्षेत्रफल काफी कम हो जाएगा। इससे फुटबॉल मैच के लिए आवश्यक पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। इसके अलावा, बिना किसी जनसुनवाई या खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के परामर्श के लिए गए इस निर्णय ने आक्रोश को और हवा दी है। इस मैदान का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है और यहाँ की मिट्टी में खेलकर कई प्रतिभाओं ने भारतीय फुटबॉल टीम में अपनी जगह बनाई है।


प्रस्तावित सौंदर्यीकरण के बाद मैदान का विभाजन (अनुमानित) :

यह चार्ट दर्शाता है कि रनिंग ट्रैक और अन्य निर्माण के कारण मूल खेल क्षेत्र (फुटबॉल पिच) पर कितना प्रभाव पड़ेगा।कोलाबा के स्थानीय फुटबॉल प्रशिक्षकों (Coaches) और पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ियों द्वारा दिया गया तकनीकी विवरण, जिसमें रनिंग ट्रैक के कारण मैदान के छोटे होने की बात कही गई है।


  • 65%: बचा हुआ फुटबॉल खेल क्षेत्र।
  • 20%: नया प्रस्तावित रनिंग ट्रैक (धावपट्टी)।
  • 15%: अन्य सौंदर्यीकरण निर्माण (बैठने की जगह, पाथवे आदि)।

अगर देखा जाये तो 35% मैदान का हिस्सा फुटबॉल गतिविधियों के लिए हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इसी कारण 'कुलाबा बैकगार्डन (सबिना चंद्रशेखर) बचाव समिति' द्वारा महापालिका आयुक्त (BMC Commissioner) भूषण गगरानी को औपचारिक पत्र सौंपा गया है।


मैदान से निकले कुछ प्रमुख राष्ट्रीय खिलाड़ी :

  • बंड्या कडे और सौरभ मेहेर
  • माइकल फुर्ताडो और रमेश मिस्त्री
  • यशवंत तांडेल, अजीत भोईर और हर्षद मेहेर



कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर, 'कुलाबा बैकगार्डन बचाव समिति' ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए महापालिका आयुक्त भूषण गगरानी को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। इस पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि सौंदर्यीकरण के कार्यों को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और स्थानीय हितधारकों के साथ चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनके सुझावों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो वे सड़कों पर उतरकर तीव्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

अंततः, यह विवाद केवल एक मैदान के सौंदर्यीकरण का नहीं, बल्कि मुंबई की खेल विरासत को बचाने की लड़ाई बन गया है। यदि प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच संवाद की कमी बनी रही, तो कोलाबा की यह ऐतिहासिक खेल भूमि कंक्रीट और कृत्रिम घास के जाल में उलझकर अपनी पहचान खो सकती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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