मुंबई। चेम्बूर तेरापंथ भवन में नवरात्रि अनुष्ठान के द्वितीय दिवस पर ‘लोगस्स’ का विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया। युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री ठाणा-6 के पावन सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने उल्लास और निष्ठा के साथ अनुष्ठान में भाग लिया। इस दौरान मंत्रों के प्रयोग, उनके प्रभाव और व्यक्तित्व निर्माण में लोगस्स स्तुति के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

अनुष्ठान में संभागियों को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि मंत्र केवल श्रवण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका प्रयोग अधिक महत्वपूर्ण है। मंत्रों के प्रयोग से व्यक्ति का आंतरिक और बहिरंग व्यक्तित्व दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि लोगस्स ऐसी स्तुति है, जिसमें एक साथ चौबीस तीर्थंकरों की स्तवना की गई है। यह व्यक्तित्व निर्माण का उत्तम मंत्र है।


मुख्य वक्ता साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने अपने प्रेरक वक्तव्य में ‘लोगस्स सूत्र’ से जुड़ी अनेक आश्चर्यकारी बातें बताईं। उन्होंने लोगस्स पाठ के विभिन्न मंत्रों की गहन चर्चा सरस और प्रभावी शैली में की। साथ ही, श्रद्धालुओं को इन मंत्रों का दैनंदिन जीवन में प्रयोग करने की प्रेरणा दी।

अनुष्ठान का प्रारंभ भक्तामर के समूह सस्वर संगान से हुआ। प्रतिदिन निर्धारित नवान्हिक अनुष्ठान के क्रम में पूरा वातावरण सौम्यता और दिव्यता से भर गया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने चारों दिशाओं में लोगस्स पाठ किया और आनंदानुभूति की।

चेम्बूर तेरापंथ भवन में आयोजित इस अनुष्ठान में लोगस्स सूत्र के आध्यात्मिक महत्व, मंत्रों के प्रयोग और दैनिक जीवन में उनकी उपयोगिता पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। साध्वी निर्वाणश्री और साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान में निष्ठापूर्वक सहभागिता की।

Pratahkal Bureau

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