चुनाव ड्यूटी में लापरवाही पड़ी भारी: गायब बीएलओ पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश
मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में लापरवाही पर बीएमसी प्रशासन सख्त। ड्यूटी से नदारद अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

बीएमसी मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा और डॉ. अश्विनी जोशी ने चुनाव कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर एफआईआर के निर्देश दिए।
मुंबई में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण और पुनरीक्षण के विशेष अभियान में कोताही बरतने वाले मतदान केंद्र स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) पर अब प्रशासन का चाबुक चलने वाला है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने चुनावी कार्य के प्रति उदासीनता दिखाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाते हुए उनके विरुद्ध संबंधित पुलिस थानों में तत्काल प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि चुनाव जैसे राष्ट्रीय और संवेदनशील कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह निर्णय बीएमसी मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। बैठक में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा और अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि बार-बार नोटिस और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई कर्मचारी अपनी ड्यूटी से गायब हैं। मतदाता सूचियों की मैपिंग और तार्किक विसंगतियों को दूर करने का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा करना अनिवार्य है, जिसमें बाधा डालने वाले डिफॉल्टरों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष अभियान के लिए बीएमसी ने 7,300 से अधिक कर्मचारियों को तैनात किया है, जबकि बैकअप के रूप में 1,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। इस कार्य में बीएमसी के अतिरिक्त जीएसटी विभाग, आयकर विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय और निजी गैर-अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों सहित विभिन्न विभागों के कर्मियों को शामिल किया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों का कार्यस्थल से अनुपस्थित रहना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अभियान को गति देने के लिए आगामी 13 और 14 जून को सभी बीएलओ के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है। प्रशासन की यह सख्त कार्रवाई चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और शुचिता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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