मुंबई के 222 आदिवासी पाडों के विकास को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने बीएमसी को अहम निर्देश दिए। जानिए बैठक में क्या फैसले हुए।

मुंबई महानगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आदिवासी समाज के नागरिकों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अपनी पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने बीएमसी मुख्यालय का दौरा किया और अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने बीएमसी प्रशासन को निर्देश दिए कि मुंबई महानगर क्षेत्र में स्थित सभी 222 आदिवासी पाडों में बड़े स्तर पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों तक केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने बीएमसी क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की आबादी को उपलब्ध कराई जा रही नागरिक सुविधाओं, आरक्षण नीति के अनुरूप सरकारी नौकरियों में भर्ती तथा पदोन्नति की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक की शुरुआत में आयोग के अधिकारी राजीव सक्सेना ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करना आयोग की प्रमुख जिम्मेदारी है।

इसके बाद बीएमसी के सामान्य प्रशासन विभाग के उपायुक्त किशोर गांधी ने कंप्यूटर प्रेजेंटेशन के माध्यम से आदिवासी आबादी को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य, चिकित्सा और शैक्षणिक सुविधाओं की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बीएमसी की बिंदु नियमावली, श्रेणीवार पदों की संख्या तथा भर्ती प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण भी आयोग के समक्ष रखा।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के निर्देशों का स्वागत करते हुए बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे ने भरोसा दिलाया कि आयोग द्वारा दिए गए सभी सुझावों को गंभीरता से लागू किया जाएगा और उन्हें शीघ्र जमीनी स्तर पर अमल में लाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के समक्ष आने वाली स्थानीय शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष समन्वय अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो ऐसे मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करेंगे।

बैठक में बीएमसी की अतिरिक्त कमिश्नर प्राजक्ता वर्मा लवंगारे, सह-आयुक्त विश्वास शंकरवार, उपायुक्त प्रशांत गायकवाड़, शिक्षा उपायुक्त प्राची जांभेकर, निदेशक श्रीधर चौधरी, आयोग के वरिष्ठ सलाहकार आर. के. दुबे, अनुसंधान अधिकारी अंकित कुमार सेन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस पहल से मुंबई के आदिवासी पाडों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के माध्यम से महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story