मुंबई: पेड़ों की छंटनी पर BMC की नई नियमावली, क्या कागजों से बाहर निकलकर जमीन पर दिखेगा असर?
मुंबई में मानसून हादसों को रोकने के लिए BMC ने ठेकेदारों के लिए सख्त जुर्माना नियमावली लागू की है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इसे केवल कागजी कार्रवाई बताते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या जमीन पर दिखेगा बदलाव?

मुंबई में हर साल मानसून के दौरान पेड़ और उनकी भारी-भरकम शाखाएं गिरने से होने वाले जानलेवा हादसों को रोकने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने ठेकेदारों के लिए एक बेहद सख्त नियमावली और जुर्माना चार्ट तैयार किया है। इस आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, अगर कोई पेड़ सड़क पर गिरता है और उससे यातायात प्रभावित होता है, तो शिकायत मिलने के निर्धारित समय के भीतर उसे न हटाने पर ठेकेदार पर प्रति पेड़ 10,000 रुपये रोजाना का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, यदि ठेकेदार द्वारा किसी पेड़ का पुनर्रोपण किया जाता है और वह पेड़ छह महीने के भीतर मर जाता है, तो भी प्रति पेड़ 10,000 रुपये का दंड भुगतना होगा। काम के दौरान पेड़ों के किसी हिस्से को नुकसान पहुंचाने या साइट पर तकनीकी स्टाफ उपलब्ध न कराने पर भी हर बार 10,000 रुपये का जुर्माना तय किया गया है।
इस कड़े फैसले पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के वरिष्ठ नेता संदीप देशपांडे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बीएमसी कागजों पर तो बड़े-बड़े नियम और जुर्माने की शर्तें लिख देती है, लेकिन असलियत यह है कि जमीन पर इनका पालन कराने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ये नियम सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं, तो मुंबईकरों को हादसों से कभी मुक्ति नहीं मिलेगी। प्रशासन को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि इस बार मानसून में बीएमसी को इन नियमों को लेकर बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए और लापरवाही करने वाले ठेकेदारों के साथ-साथ दोषी अधिकारियों को भी सलाखों के पीछे भेजना चाहिए।
मनपा के इस विस्तृत टेंडर दस्तावेज के मुताबिक, संशयास्पद या अंदर से खोखले हो चुके पेड़ों की आंतरिक स्थिति की जांच करने के लिए ठेकेदारों को रेजिस्टोग्राफ और ट्री-रडार जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग करना अनिवार्य होगा। मानसून के दौरान किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ठेकेदारों को 24 घंटे काम करने वाला एक विशेष नियंत्रण कक्ष बनाना होगा, जहां एक सुपरवाइजर हमेशा मोबाइल फोन और कम से कम 10 घन मीटर क्षमता वाले कबाड़ उठाने वाले ट्रक के साथ तैनात रहेगा। नियमावली में स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी गिरे हुए या खतरनाक पेड़ को हटाने की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई पूरी हो जानी चाहिए।
नियमों में सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। पेड़ों की छंटनी इस वैज्ञानिक तरीके से करनी होगी कि अगले 12 महीनों तक दोबारा उसी पेड़ को काटने की नौबत न आए और यदि साल में एक से अधिक बार छंटनी की जरूरत पड़ती है, तो ठेकेदार को वह काम मुफ्त में करना होगा। साथ ही, पेड़ों से निकलने वाले कचरे को बीएमसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर तुरंत नष्ट करना होगा। पेड़ों पर कीटनाशकों का छिड़काव करने और खतरनाक खोखले पेड़ों को कंक्रीट या पॉलीयुरेथेन फोम से भरने के निर्देश भी दिए गए हैं। काम पर तैनात मजदूरों के लिए सफेद रिफ्लेक्टिव हरी जैकेट, पीला हेलमेट और सुरक्षा बेल्ट पहनना अनिवार्य किया गया है।

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