बीएमसी स्थाई समिति बैठक: विपक्ष का वॉकआउट, बिना चर्चा के पास हुए 64 प्रस्ताव
मुंबई बीएमसी की स्थाई समिति बैठक में घमासान, विपक्ष का वॉकआउट। सत्ता पक्ष पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए बिना चर्चा के ही पास किए गए 64 महत्वपूर्ण प्रस्ताव। शहर के बुनियादी ढांचे और जनहित से जुड़े मुद्दों पर आखिर क्यों नहीं हुई चर्चा?

मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की स्थाई समिति की बैठक शुक्रवार को भारी हंगामे और राजनीतिक खींचतान का अखाड़ा बन गई। सत्ता पक्ष पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए विपक्षी दल के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने बिना किसी विस्तृत चर्चा के जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को धड़ाधड़ मंजूरी दे दी।
बैठक का मुख्य विवाद तब शुरू हुआ जब विपक्षी सदस्य बीएमसी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त सामग्री और जूते-मोजे वितरण, तथा प्रभाग समिति अध्यक्षों के लिए गाड़ियों के किराए पर प्रावधान जैसे विषयों पर अपनी बात रखना चाहते थे। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें बोलने का अवसर दिए बिना ही एजेंडे में शामिल प्रस्तावों को पारित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस व्यवहार से आक्रोशित होकर विपक्षी पार्षदों ने जमकर हंगामा किया और सदन का बहिष्कार कर बाहर चले गए।
इस बैठक में मुंबई की सुरक्षा, नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से संबंधित कुल 65 प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखे गए थे। इनमें मानसून पूर्व तैयारियों के तहत सड़कों के गड्ढे भरने के 16 प्रस्ताव, जलभराव से निपटने के लिए पंप व्यवस्था, जलवाहिनियों की सफाई, सफाई कर्मचारियों के लिए 'आश्रय योजना' के ठेकों में बदलाव, अस्पतालों में लिफ्ट की स्थापना और 'बेस्ट' उपक्रम को 1000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जैसे अति संवेदनशील मुद्दे शामिल थे।
विपक्ष के अनुसार, जब वरिष्ठ सदस्यों यशोधर फणसे, अशरफ आजमी, यशवंत किल्लेदार और श्रद्धा जाधव ने प्रस्ताव संख्या 42 से 56 के बीच चर्चा के लिए अनुमति मांगी, तो उनकी अनदेखी कर प्रस्तावों को एकतरफा मंजूरी दी जाने लगी। विपक्ष के वॉकआउट के बाद भी अध्यक्ष ने 64 नंबर तक के अधिकांश प्रस्तावों को पारित कर दिया, जबकि पिछले सत्र के एक लंबित प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया गया है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के इस तरह के संचालन ने विपक्षी खेमे में भारी असंतोष पैदा कर दिया है, जो बीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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