मुंबई बीएमसी में मृत जानवरों के निपटारे पर हंगामा, पांच साल के आंकड़ों पर जवाब तलब
मुंबई बीएमसी की स्थायी समिति में मृत जानवरों के निपटारे को लेकर पार्षदों ने प्रशासन को घेरा। ठेकेदारों की मनमानी पर उठे सवालों के बीच अध्यक्ष ने पांच साल के आंकड़ों की रिपोर्ट मांगी। जानिए आखिर क्या है पूरा मामला और प्रशासन का क्या है जवाब।

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में शहर की सार्वजनिक स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मुद्दा छाया रहा। महानगर के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाने वाले मृत जानवरों को उठाने और उनके वैज्ञानिक निपटारे के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पार्षदों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीएमसी गटनेता अमय घोले ने बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि मृत जानवरों को उठाकर कहां ले जाया जाता है और उनके निपटारे की सटीक व्यवस्था क्या है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि नागरिक सड़कों या घरों में चूहा मरने की भी शिकायत करते हैं, तो संबंधित विभाग यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए एआईएमआईएम के नगरसेवक जमीर कुरेशी ने ठेकेदारों की मनमानी को उजागर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती और ठेकेदार केवल चुनिंदा मामलों पर ही ध्यान देते हैं। कुरेशी ने मृत जानवरों को ले जाने और उनके निपटारे की प्रक्रिया पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए एक विशेष तंत्र विकसित करने की मांग की। इसी क्रम में टुलिप मिरांडा ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए गंभीर आरोप लगाया कि मृत जानवरों को उठाने वाली गाड़ियां अक्सर समय पर उपलब्ध नहीं होती हैं। उन्होंने बताया कि दोपहर के बाद पशु श्मशान भूमि बंद होने के कारण ठेकेदार मृत जानवरों को वापस लाकर सार्वजनिक स्थलों पर ही छोड़ देते हैं, जिससे दुर्गंध फैलती है।
बीएमसी के नियमों के अनुसार मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में सड़कों की सफाई, कचरा प्रबंधन और मृत जानवरों को तुरंत हटाना पालिका की वैधानिक व नैतिक जिम्मेदारी है। ऐसा न होने पर शहर में संक्रामक बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा बना रहता है। हंगामे के बीच बीएमसी के अतिरिक्त कमिश्नर अविनाश ढाकने ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि मुंबई में इस व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए विशेष ट्रॉली और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस नए ठेकेदारों की नियुक्ति का प्रस्ताव लाया गया है। इसके बाद स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने प्रशासन को निर्देश दिया कि सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी सवालों और पिछले पांच वर्षों में मरे हुए जानवरों के आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट जल्द पेश की जाए। इन सुधारों के आश्वासन के साथ ही समिति ने जनहितैषी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

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