मुंबई में बीएमसी स्कूलों में विद्यार्थियों को वितरित की गई कॉपियों में तय संख्या से कम पन्ने पाए जाने का मामला सामने आया है। सितंबर का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन बीएमसी स्कूलों के कई बच्चों को पढ़ाई का जरूरी सामान अब तक पूरा नहीं मिल पाया है। जल्द ही छमाही परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और कई विद्यार्थियों को अभी तक कॉपियां नहीं मिली हैं। इसी बीच वितरित की गई कॉपियों में पन्ने कम होने की शिकायत ने मामला और गंभीर कर दिया है।

जांच में सामने आया कि बीएमसी स्कूलों में दी गई कॉपियों में तय संख्या की तुलना में करीब 5 से 12 पन्ने कम हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिवसेना के शिक्षा समिति सदस्य प्रियांक राउत ने दहिसर इलाके के तरे मार्ग स्थित मुंबई पब्लिक स्कूल का दौरा किया, जहां सातवीं कक्षा के बच्चों को मिली कॉपियों की जांच में पन्ने कम पाए गए।

मामला केवल सातवीं कक्षा तक सीमित नहीं है। पहली से लेकर दसवीं कक्षा तक के बच्चों को वितरित की गई कॉपियों में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई है। बताया गया है कि एक पन्ने की कीमत लगभग 18 पैसे होती है। ऐसे में अगर हर कॉपी में तय संख्या से पन्ने कम किए गए हैं, तो यह मामला लाखों रुपये के बड़े घोटाले में बदल सकता है।

बीएमसी की ओर से इन कॉपियों की आपूर्ति का ठेका तीन साल के लिए लगभग 21 करोड़ रुपये में एक निजी कंपनी को दिया गया था। ऐसे में तय संख्या से कम पन्नों वाली कॉपियां बच्चों तक पहुंचने को लेकर सप्लायर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

बीएमसी में पूर्व नेता प्रतिपक्ष किशोरी पेडनेकर ने बच्चों के साथ हुए इस धोखे पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि कम पन्नों वाली कॉपियां सप्लाई करने वाले ठेकेदार और ऐसी लापरवाही बरतने वालों को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही संबंधित ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाने की भी मांग की गई है।

छमाही परीक्षाओं से पहले कॉपियों की कमी और वितरित कॉपियों में तय संख्या से कम पन्ने मिलने से बीएमसी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ा यह मामला गंभीर सवाल खड़े करता है।

Pratahkal Newsroom

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