प्रातःकाल संवाददाता, मुंबई। आर्थिक राजधानी मुंबई के बीएमसी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का भविष्य अब और भी उज्ज्वल होने जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने अपने स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भायखला के पेंग्विन सभागार में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में 'बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान' अभियान की सफलता पर मुहर लगाई गई। इस विशेष मुहिम के तहत मुंबई के विभिन्न माध्यमों वाले स्कूलों के पहली से चौथी कक्षा के लगभग 1 लाख 20 हजार बच्चों को सीधे तौर पर जोड़ा गया है। शिक्षा विभाग के इस प्रयास का असर अब धरातल पर दिखने लगा है।

निपुण भारत अभियान और 2027 का लक्ष्य

दरअसल, 'निपुण भारत अभियान' के तहत बीएमसी का लक्ष्य है कि साल 2027 तक हर बच्चा पढ़ने और गणित के सरल सवालों को हल करने में पूरी तरह सक्षम हो जाए। बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि जनवरी 2025 में जब दूसरी कक्षा के बच्चों पर यह प्रयोग शुरू हुआ था, तब कई बच्चे अटक-अटक कर पढ़ते थे। लेकिन अब जून 2025 से इसे व्यापक स्तर पर लागू करने के बाद बच्चों की अक्षर पहचान और भाषा की समझ में क्रांतिकारी बदलाव आया है। आज बीएमसी स्कूलों के बच्चे न सिर्फ बेहतर पढ़ रहे हैं, बल्कि गणितीय गणनाओं में भी उनकी रुचि बढ़ी है।





विशेषज्ञों और अधिकारियों का संबोधन

इस मौके पर शिक्षा जगत के दिग्गजों ने शिक्षकों की भूमिका को सराहा। शिक्षा सचिव रणजीतसिंह देओल ने कहा कि "मुंबई जैसे शहर में जहाँ विविध भाषाओं के बच्चे पढ़ते हैं, वहां बच्चों का आधार मजबूत करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे बीएमसी बखूबी निभा रही है।" अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे ने भावुक होते हुए कहा कि "शिक्षक ही स्कूल की आत्मा होते हैं और बचपन में मिले संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं।" इस अभियान की सफलता को देखते हुए अब इसे पूरे महाराष्ट्र में लागू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि राज्य का हर बच्चा शिक्षा की दौड़ में पीछे न रहे।

Pratahkal Bureau

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